
नई दिल्ली । अध्ययन की मुख्य लेखिका आयशा एम. अशरफ के अनुसार, तीव्र सौर गतिविधि के दौरान सूर्य अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण और आवेशित कण उत्सर्जित करता है। इससे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (थर्मोस्फीयर) की गैसें गर्म होकर फैलती हैं, इसके चलते वायुमंडल का घनत्व बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ घनत्व अंतरिक्ष में ड्रैग (अवरोध) पैदा करता है, जो सैटेलाइट्स की गति धीमी कर उन्हें नीचे की ओर खींचने लगता है।
सूर्य के बढ़ते तेवर धरती पर समय से पहले ही पुराने उपग्रह गिरा रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे पर चेताते हुए यह जानकारी साझा की है। इसरो के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में पुष्टि हुई है कि सूर्य की बढ़ती सक्रियता के कारण पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद मृत सैटेलाइट और मलबे अपनी निर्धारित कक्षा से समय से पहले नीचे गिर रहे हैं।
तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह साबित किया है कि सौर गतिविधि के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अंतरिक्ष मलबा कितनी तेजी से नीचे गिरेगा। फ्रंटियर्स इन एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस साइंसेज में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, जब सूर्य 11 साल की सक्रियता के चक्र के 67% के स्तर को पार कर लेता है, तब मलबे के नीचे गिरने की गति बढ़ जाती है।
अध्ययन की मुख्य लेखिका आयशा एम. अशरफ के अनुसार, तीव्र सौर गतिविधि के दौरान सूर्य अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण और आवेशित कण उत्सर्जित करता है। इससे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (थर्मोस्फीयर) की गैसें गर्म होकर फैलती हैं, इसके चलते वायुमंडल का घनत्व बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ घनत्व अंतरिक्ष में ड्रैग (अवरोध) पैदा करता है, जो सैटेलाइट्स की गति धीमी कर उन्हें नीचे की ओर खींचने लगता है।
36 वर्षों के डाटा विश्लेषण के आधार पर निकला निष्कर्ष
वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक में लॉन्च किए गए मलबे के 17 टुकड़ों की गतिविधियों का 36 वर्षों (सौर चक्र 22 से 24 तक) तक बारीकी से अध्ययन किया। ये टुकड़ा 600 से 800 किमी की ऊंचाई पर स्थित थे। चूंकि इस मलबे में खुद को नियंत्रित करने के लिए ईंधन नहीं होता, इसलिए ये वायुमंडलीय परिवर्तनों को समझने के लिए सटीक माध्यम साबित हुए। वैज्ञानिकों ने कहा, ये खोज भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सक्रिय सैटेलाइट को कक्षा में रोकने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता : अध्ययन में यह भी कहा गया है कि सक्रिय सैटेलाइट्स को अपनी कक्षा बनाए रखने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता होगी। मलबे के तेजी से रास्ता बदलने के कारण स्पेसएक्स जैसे मेगा-कॉन्स्टेलेशन और अन्य उपग्रहों के बीच टक्कर (स्टारलिंक) का जोखिम बढ़ सकता है। अब सैटेलाइट आॅपरेटरों को मिशन डिजाइन करते समय सौर संक्रमण सीमा का ध्यान रखना होगा।




