थॉमस कप में पदक के बावजूद कोई चर्चा नहीं: निराश सात्विक का टूटा दिल; चिराग-प्रणय ने दिया झकझोर देने वाला बयान

नई दिल्ली । भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सत्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने थॉमस कप 2026 में कांस्य पदक जीतने के बाद बड़ा बयान देकर खेल जगत में बहस छेड़ दी है। दोनों खिलाड़ियों ने साफ कहा कि भारत अभी भी खेल राष्ट्र नहीं बना है और यहां बैडमिंटन जैसी उपलब्धियों को वह सम्मान नहीं मिलता, जो मिलना चाहिए। सबसे चौंकाने वाला बयान सत्विक का रहा, जिन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को बैडमिंटन नहीं खिलाना चाहेंगे।
डेनमार्क में थॉमस कप में पदक जीतने के बाद जब भारतीय टीम स्वदेश लौटी, तो खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि देश इस सफलता पर गर्व करेगा, लेकिन एयरपोर्ट पर जो हुआ, उसने खिलाड़ियों को निराश कर दिया। सत्विक ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर भी लिखा था, ‘घर लौट आए हैं। हमेशा की तरह किसी को नहीं पता कि पिछले दो हफ्तों में क्या हुआ, और लगता है किसी को फर्क भी नहीं पड़ता।’ बाद में उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, ‘हम जर्मनी से सात घंटे की फ्लाइट लेकर हैदराबाद पहुंचे। किसी ने यह तक नहीं पूछा कि हम कौन हैं या कौन सा मेडल जीतकर आए हैं। हम थॉमस कप की जर्सी पहने थे, लेकिन सब लोग आईपीएल, राजनीति या दूसरी चीजों में व्यस्त थे।’
सत्विक ने याद दिलाया कि 2022 में भारत ने पहली बार थॉमस कप गोल्ड जीता था, लेकिन तब भी जश्न वैसा नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘जब हम 2022 में जीते थे, तब भी इसे और बड़े स्तर पर मनाया जाना चाहिए था। लोग नहीं समझते कि ऐसे मौके बार-बार नहीं आते। थॉमस कप जीतना बहुत मुश्किल है, मेडल जीतना भी आसान नहीं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘एयरपोर्ट पर प्रणय, श्रीकांत और ध्रुव जैसे खिलाड़ी खुद कैब बुक कर रहे थे। मेरे दोस्त मुझे लेने आए थे, लेकिन वह दृश्य देखकर मैं बहुत दुखी था।’
सत्विक ने सबसे बड़ा बयान तब दिया जब उन्होंने भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रणय से कहा कि मैं अपने बच्चे को बैडमिंटन नहीं खेलने दूंगा। अगर आप मानसिक रूप से मजबूत हैं तो संभाल लेंगे, वरना जब देश का बड़ा हिस्सा आपकी मेहनत से अनजान हो, तब आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।’ हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें बड़े सम्मान की अपेक्षा नहीं है। सात्विक ने कहा, ‘हैदराबाद अकादमी में हमें सम्मान मिला, छोटा सा बुके मिला, केक कटा, वही काफी था। हमें कुछ भव्य नहीं चाहिए।’
सत्विक के जोड़ीदार चिराग शेट्टी ने भी निराशा जताई। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि भारत में कुछ खेलों को छोड़ बाकी उपलब्धियों की अहमियत अब भी नहीं समझी जाती। उन्होंने कहा, ‘हमें एयरपोर्ट पर भीड़ की उम्मीद नहीं थी। पिछली बार जब हम जीते थे, हमारा स्वागत हुआ था, प्रधानमंत्री से मिले थे, सम्मान भी मिला था। लेकिन उस जीत का जश्न वैसा नहीं मनाया गया जैसा होना चाहिए था। जो लोग बैडमिंटन देखते हैं, वे समझते हैं, लेकिन आम जनता 2022 की जीत की अहमियत नहीं समझती। यह सोचकर दुख होता है कि हम अभी तक स्पोर्टिंग नेशन नहीं बने हैं।’
चिराग ने कहा, ‘हां, हम बहुत सारे मेडल जीतते हैं, लेकिन हम अपने खिलाड़ियों का जश्न उस तरह नहीं मनाते जैसे मनाना चाहिए। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार और खेल संस्थाएं अपना काम कर रही हैं, लेकिन पूरे खेल माहौल को खिलाड़ियों की उपलब्धियों का सम्मान करना शुरू करना होगा।’ यह कोई पहली बार नहीं है। चिराग पहले भी इस मुद्दे पर बोल चुके हैं।
एचएस प्रणय ने भी खिलाड़ियों की भावना समझाई। उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि बैडमिंटन व्यक्तिगत खेल है, लेकिन थॉमस कप जैसे टूनार्मेंट में खिलाड़ी देश के लिए टीम बनाकर खेलते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर खिलाड़ी मिलकर थॉमस कप जीत सकते हैं, तो उसे उसी स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। दुर्भाग्य से कई लोग यह तक नहीं समझते कि थॉमस कप दरअसल बैडमिंटन का वर्ल्ड कप जैसा टूनार्मेंट है। जब इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद पहचान नहीं मिलती, तो खिलाड़ियों के लिए हर बार प्रेरित रहना मुश्किल हो जाता है।’सत्विक, चिराग और प्रणय के बयान सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति के लिए चेतावनी भी हैं। क्रिकेट के बीच दूसरी खेल उपलब्धियां अक्सर दब जाती हैं। अगर देश को सच में खेल महाशक्ति बनना है, तो हर मेडल और हर खिलाड़ी का सम्मान जरूरी होगा।




