मथुरा

मथुरा के राधादामोदर मंदिर में खेली गई फूलों की होली:भगवान को सुनाए गए भजन

मथुरा । भगवान राधा कृष्ण की नगरी में फागुन का रंग चढ़ने लगा है। वृंदावन के प्रतिष्ठित सप्त देवालयों में से एक राधादामोदर मंदिर में होली महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर राधा-कृष्ण के जयकारों और अबीर-गुलाल से सराबोर नजर आया। जैसे ही मंदिर के पट खुले समूचा परिसर होली है के उद्घोष से गूंज उठा।
मंदिर के सेवायत आचार्य तरुण गोस्वामी और निताई गोस्वामी ने भगवान के चरणों से स्पर्श कराया हुआ प्रसादी गुलाल और फूलों की वर्षा भक्तों पर की। अपने आराध्य का आशीर्वाद स्वरूप गुलाल पाकर देश-विदेश से आए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महोत्सव के दौरान ब्रज की पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
ब्रजवासी महिलाओं ने होली के विशेष पदों और भजनों का गायन किया, जिस पर भक्त स्वयं को थिरकने से रोक नहीं पाए। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने श्रीराधा-कृष्ण के स्वरूपों के साथ फूलों की होली खेली और हरिनाम संकीर्तन के बीच जमकर आनंद लिया।
मंदिर सेवायत निताई गोस्वामी महाराज ने बताया कि मंदिर सेवायत आचार्य तरुण गोस्वामी महाराज के सानिध्य में मंदिर परिसर में विशेष होली महोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में फूल एवं गुलाल की होली खेली गयी। जिसमे भक्तों के ऊपर ठाकुर जी के प्रसादी फूल एवं गुलाल डालकर होली की बधाई दी गई।
ब्रज की गोपियों के द्वारा भव्य होली गीतों का गायन किया गया। साथ ही होली गीतों पर श्रद्धालु महिलाएं थिरकती हुई नजर आई। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में सभी ब्रज की गोपी महिलाओं को प्रसादी वितरण की गई है।
सेवायत निताई गोस्वामी ने बताया कि बसंत पंचमी से शुरू हुई होली की प्रतीकात्मक शुरूआत अब पूर्ण रंगत में बदल गई है। ठाकुरजी ने श्वेत पोशाक धारण की और कमर में फेंटा बांधकर भक्तों पर प्रसादी गुलाल उड़ाया। इस दौरान मंदिर परिसर में ठाकुर राधा दामोदर लाल की जय के जयकारों से गुंजायमान रहा और श्रद्धालु भक्ति में विभोर होकर नृत्य करने लगे।
की परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी से फुलैरा दौज तक मंदिरों में केवल होली के पदों का गायन किया जाता है, लेकिन फुलैरा दौज से ठाकुरजी के विग्रह की कमर पर फेंटा बांधने की रस्म के साथ ही गुलाल और रंगों की सक्रिय होली शुरू हो जाती है।

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