व्यापार

अंतरिक्ष पर निर्भर देश की सुरक्षा, राज्यसभा में भाजपा सांसद ने उठाया स्पेस फोर्स का मुद्दा

नई दिल्ली राज्यसभा में सोमवार को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। ओडिशा से भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने सदन में स्वतंत्र स्पेस फोर्स के गठन की जोरदार पैरवी करते हुए कहा कि अंतरिक्ष अब सिर्फ विज्ञान या अनुसंधान का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं से सीधे जुड़ा रणनीतिक डोमेन बन चुका है।
सांसद ने कहा कि आज कॉल, इंटरनेट, जीपीएस, बैंकिंग, निगरानी और सैन्य अभियानों का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों पर निर्भर है। अगर दुश्मन देश ने अंतरिक्ष में थोड़ी-सी भी गड़बड़ी की, तो इसका सीधा असर जमीन पर देश की सुरक्षा और व्यवस्था पर पड़ेगा।
सुजीत कुमार ने सदन में कहा कि या तो हम उस खामोश हमले का इंतजार करें जो हमारी अर्थव्यवस्था को ठप कर दे, या फिर पहले से ऐसी ताकत खड़ी करें कि ऐसा हमला हो ही न सके। स्पेस फोर्स हमें सितारों में जंग जीतने के लिए नहीं, बल्कि जमीन पर जंग हारने से बचाने के लिए चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए, जो स्वतंत्र स्पेस फोर्स और स्पेस वॉरफेयर अकादमी की जरूरतों का आकलन कर जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि 2019 में डिफेंस स्पेस एजेंसी और डिफेंस स्पेस रिसर्च आॅर्गनाइजेशन की स्थापना व एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण की सफलता ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत स्पेस पावर के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में यह पर्याप्त नहीं है।
चीन और अमेरिका के पास पहले से है ये क्षमता
सांसद ने बताया कि अमेरिका पहले ही 2019 में स्पेस फोर्स का गठन कर चुका है और चीन के पास भी अंतरिक्ष से जुड़ी विशेष सैन्य क्षमताएं हैं।
ऐसे में भारत किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा डिफेंस स्पेस एजेंसी एक अच्छी शुरूआत जरूर है, लेकिन यह अभी अस्थायी ढांचे में काम कर रही है।
इसके पास न तो अपना अलग कैडर है, न पूरी कमान और न ही स्थायी संचालन व्यवस्था।
आने वाले वर्षों में भारत के कई नए सैन्य उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात होंगे, जिनकी चौबीसों घंटे सुरक्षा और निगरानी के लिए एक समर्पित स्पेस फोर्स की जरूरत होगी।
सांसद का कहना था कि पारंपरिक सैन्य कमांड अकेले इस चुनौती को नहीं संभाल सकते और समय की मांग है कि भारत जल्द से जल्द एक स्वतंत्र स्पेस फोर्स के गठन पर ठोस कदम उठाए।

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button