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केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के पांच बड़े कारण, जानें विजयन सरकार को कैसे मिली हार

नई दिल्ली । कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत की ओर बढ़ रहा है। मतगणना के रुझान दस साल बाद सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के शासन का अंत होगा।
चुनाव आयोग के दोपहर 3 बजे के रुझानों के अनुसार, यूडीएफ 140 में से 96 सीटों पर आगे है। यह गठबंधन आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस- 64 सीट, 15 जीत, 49 पर आगे, आईयूएमएल- 22 सीट, दो जीत, 20 पर आगे, केरल कांग्रेस- सात सीट, दो जीत, पांच पर आगे रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी , केरल कांग्रेस (जैकब) एक सीट पर आगे हैं। वहीं, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया ने एक सीट पर जीत हासिल की है।
विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को 140 निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ था। इसमें 78.27 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है।
एलडीएफ सरकार को अपनी कमजोरियों के चलते हार का सामना करना पड़ा। सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों ने एलडीएफ की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। एलडीएफ सरकार को 10 साल के शासन के बाद स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में कोरोना महामारी के दौरान किए गए अच्छे कार्यों से कुछ हद तक फायदा मिला था। लेकिन, सबरीमाला सोना चोरी विवाद ने सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके दामाद-बेटी पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगे। इन आरोपों से मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि भी काफी खराब हुई, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। इन घटनाओं ने सरकार की जनधारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
केरल में कांग्रेस पार्टी ने अपनी आंतरिक एकजुटता बनाए रखी। वीडी सतीशन, एके एंटनी और शशि थरूर जैसे प्रमुख नेताओं ने मिलकर काम किया। वायनाड में हुए एक हादसे ने एलडीएफ सरकार की कमजोरियों को उजागर किया।वायनाड हादसे के बाद राहुल और प्रियंका के लगातार दौरों ने पार्टी को मजबूती दी। इन प्रयासों से कांग्रेस जनता के बीच अपनी खोई हुई पकड़ फिर से बनाने में सफल रही।

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