व्यापार

आॅटो डेबिट नियम सख्त: ग्राहकों को अपने पैसे पर मिलेगा अधिक नियंत्रण, आरबीआई ने लागू किए

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ई-मैंडेट से जुड़े नए दिशा-निर्देश मंगलवार से लागू कर दिए। नए नियमों के तहत, खाते से पैसा काटने (आॅटो डेबिट) से 24 घंटे पहले संबंधित बैंक या कार्ड जारी करने वाले वित्तीय संस्थानों को इसका अलर्ट ग्राहक को देना होगा। ये नियम उन सभी आॅटो भुगतान जैसे ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, बिल भुगतान, एसआईपी और ईएमआई पर लागू होंगे, जो कार्ड, यूपीआई या प्रीपेड माध्यमों से किए जाते हैं।
दरअसल, आरबीआई ने आॅटो डेबिट को आसान व सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल पेमेंट्स-ई-मैंडेट फ्रेमवर्क, 2026 जारी किया है। नए नियमों के जरिये ग्राहक कभी भी अपने ई-मैंडेट को बदल या पूरी तरह बंद कर सकते हैं। इससे उन्हें खाते से कटने वाले पैसों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। यदि आपने कोई आॅटो डेबिट चालू किया है और अब बंद करना चाहते हैं, तो ई-मैंडेट रद्द या बदल सकते हैं। हालांकि, आॅटो डेबिट सुविधा शुरू करने से पूर्व ग्राहक को एकबार पंजीकरण कराना होगा। वहीं, डेबिट या क्रेडिट कार्ड एक्सपायर होने पर सब्सक्रिप्शन सेवाओं के लिए बार-बार बैंक के चक्कर काटने या एप अपडेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। बैंक पुराने कार्ड के सभी भुगतान निदेर्शों को नए कार्ड पर ट्रांसफर करेंगे।
आॅटो डेबिट से 24 घंटे पहले ग्राहक को मिलने वाले अलर्ट में बैंकों या वित्तीय संस्थानों को यह बताना होगा कि किस कंपनी को पैसा जाएगा। कब और कितनी रकम कटेगी। रेफरेंस नंबर क्या होगा, ताकि गड़बड़ी की स्थिति में ग्राहक तुरंत कार्रवाई कर सके। अगर ग्राहक चाहे तो इस अवधि में उस भुगतान को रोक भी सकता है। हालांकि, फास्टैग आॅटो रिचार्ज के मामलों में यह पूर्व सूचना जरूरी नहीं होगी।
आरबीआई ने स्पष्ट कहा, ई-मैंडेट सुविधा लेने पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही, किसी भी विवाद या गलत लेनदेन की स्थिति में शिकायत दर्ज करने और समाधान के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। नए नियमों के तहत, अब बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश व क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान के लिए एक लाख रुपये तक के प्रति लेनदेन पर ओटीपी की जरूरत नहीं होगी। सामान्य ई-मैंडेट के लिए यह सीमा 15,000 रुपये तय की गई है।

Related Articles

Back to top button