मथुरा

पद, कद और प्रतिष्ठा से निकलकर भारत को बचाना होगा:हिंदू सम्मेलन में यूजीसी गाइडलाइन पर रितेश्वर महाराज बोले- जहां गलत हो, उसका विरोध होना चाहिए

मथुरा । वृंदावन में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में संत रितेश्वर महाराज ने कहा- बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया। पद, कद और प्रतिष्ठा से निकलकर हमें भारत को बचाना होगा। अफगानिस्तान,बांग्लादेश और पाकिस्तान में मंदिरों में घंटियां बजती थीं लेकिन आज वहां क्या स्थिति है यह किसी से छुपा नहीं।
यूजीसी की नई गाइड लाइन को लेकर उन्होंने कहा- जो कुछ भी गलत होता दिखे, उसका विरोध होना चाहिए। हमें विश्वास है कि सत्ता में बैठे लोग इसको सुनेंगे और त्रुटियों दूर भी करेंगे। ऐसा कोई काम न हो, जिससे समाज में वर्ग भेद और बढ़े।
मथुरा के वृंदावन में रंग जी के बड़े बगीचा में जागृत हिंदू चेतना समिति के द्वारा विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संत रितेश्वर महाराज शामिल हुए। सम्मेलन का शुभारंभ संत रितेश्वर महाराज, महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान, धमार्चार्य ध्यानमूर्ति और फरर के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। इसके बाद विद्यापीठ इंटर कॉलेज के छात्रों ने देश भक्ति से प्रेरित एक नाटक की प्रस्तुति दी।
हिंदू सम्मेलन के शुभारंभ से पहले महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। सौ से ज्यादा महिलाएं सर पर कलश लेकर कार्यक्रम स्थित रंग जी के बड़े बगीचा मैदान पर पहुंचीं। जहां उन्होंने फूलों से बनाई भारत माता की रंगोली के समक्ष कलशों को स्थापित किया। इस दौरान पूरा मैदान भारत माता और जय श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
संत रितेश्वर महाराज ने अपने संबोधन में कहा- संघ सौ वर्षों से हिंदुओं को एक करने में लगा है। आप उनके साथ खड़े नहीं हो सकते, संघर्ष नहीं कर सकते तो निंदा तो मत करो। कुछ लोग कहते हैं हिंदुत्व बचे, संघ बचे। इस पर बाबा लोग क्या कर रहे हैं, इनका काम क्या है।
बेटियों को बचाने के लिए आपको आगे आना होगा। मकान तुम्हारा, दुकान तुम्हारी, कमाई तुम करो, बेटे-बेटी तुम्हारे हैं और देश बाबा बचाए। 10 शहरों में मकान, दुकान बनवा देते हैं। पर जब आधी रात को धूं-धूं कर बांग्लादेश की तरह जलते हैं तो कहते हो, कहां है हिन्दू, कहां है हिंदू संगठन।
संत रितेश्वर महाराज ने कहा- बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया। पद,कद और प्रतिष्ठा से भारत कभी नहीं बचा। लोगों से बेटे-बेटियां बच नहीं रहे। यह समाज और राष्ट्र बचाएंगे। अपनी प्रतिष्ठा संभाली नहीं जा रही राष्ट्र की प्रतिष्ठा कैसे संभालेंगे। राष्ट्र ,समाज कोई व्यक्ति नहीं जिसे बचाओगे। लोगों का समूह, परिवारों का समूह यही समाज और राष्ट्र हैं। इसे बचाना होगा, तभी राष्ट्र बचेगा।
संत रितेश्वर महाराज ने कहा कि साधु कोई फल की तरह नहीं टपकता, बल्कि संस्कारों से बनता है। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से आगे बढ़ना है। लेकिन जैसे ही पद, प्रतिष्ठा मिलती है हम भी आम लोगों से दूर हो जाते हैं। समस्याएं केवल मंच तक बोलने तक सीमित हो जाती हैं।
हम 3 हिंदू सम्मेलन में गए हैं। लखनऊ,आगरा और वृंदावन। सम्मेलन को संबोधित करने के बाद में वहां दो बार और गया। वहां फिर जाऊंगा और तब तक जाऊंगा, जब तक उस बस्ती के लोग जाति-पाती से ऊपर सभी हिंदू समुदाय उठकर एक नहीं होंगे।

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