फरवरी अंत तक केंद्र का वित्तीय घाटा लक्ष्य के 80.4% पर पहुंचा, सीजीए की ओर से आंकड़े जारी

नई दिल्ली । चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा फरवरी माह के अंत तक वार्षिक बजट लक्ष्य के 80.4 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में 85.8 प्रतिशत की तुलना में कम है। नियंत्रक महालेखागार (सीजीए) की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 के अंत तक वित्तीय घाटा 12.52 लाख करोड़ रुपये रहा। सरकार ने 2025-26 के लिए वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत, यानी लगभग 15.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया है।
सीजीए की ओर से जारी मासिक खातों के अनुसार, फरवरी 2026 के अंत तक केंद्र की कुल प्राप्तियां बजट लक्ष्य का 82 प्रतिशत, यानी 27.91 लाख करोड़ रुपये रहीं। इन प्राप्तियों में 21.45 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (शुद्ध) और 5.8 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व शामिल है। वहीं, अप्रैल से फरवरी 2025-26 की अवधि के दौरान, केंद्र सरकार का कुल व्यय वित्तीय वर्ष के पूरे बजट लक्ष्य का 81.5 प्रतिशत, यानी 40.44 लाख करोड़ रुपये रहा।
वित्तीय घाटा किसी सरकार के कुल व्यय और उसकी कुल आय (करों और अन्य स्रोतों से) के बीच का अंतर होता है। यह दशार्ता है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कितनी उधार लेने की आवश्यकता है। एक उच्च वित्तीय घाटा अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है, जबकि एक नियंत्रित घाटा वित्तीय स्थिरता का संकेत देता है।
यह महत्वपूर्ण है कि इस वर्ष वित्तीय घाटे का प्रतिशत पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा है, जो वित्तीय प्रबंधन में कुछ हद तक सुधार का संकेत दे सकता है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्ष के अंत तक यह घाटा सरकार के अनुमानित लक्ष्य के भीतर रहता है या नहीं। फरवरी अंत तक के आंकड़े बताते हैं कि सरकार अपने वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में प्रयासरत है। प्राप्तियों में वृद्धि और व्यय का प्रबंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले महीनों के आंकड़े और अधिक स्पष्टता प्रदान करेंगे कि क्या सरकार अपने वित्तीय लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर पाएगी।



