शंकराचार्य से दुर्व्यवहार पर तीर्थ पुरोहित महासभा का विरोध:माथुर चतुर्वेद परिषद ने सरकार से सार्वजनिक माफी की मांग की

मथुरा। मथुरा में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा और माथुर चतुर्वेद परिषद ने जगतगुरु शंकराचार्य के साथ माघ मेले में हुए कथित दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध किया है। दोनों संस्थाओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता में राज्य सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया।
संस्था के मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शंकराचार्य के साथ किया गया व्यवहार एक सोची-समझी साजिश का परिणाम लगता है। उन्होंने इसे सनातन संस्कृति और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। पाठक ने मांग की कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य जी से माफी मांगे।
पाठक ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब जगतगुरु शंकराचार्य माघ मेले से बिना स्नान किए लौट गए। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, सरकार का दायित्व था कि वह शंकराचार्य जी का सम्मानपूर्वक स्वागत करती, उन्हें स्नान कराती और आदर के साथ विदा करती।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि दोनों संस्थाएं जल्द ही शंकराचार्य जी के समर्थन में एक औपचारिक पत्र जारी करेंगी। मामले की निष्पक्ष जांच और मार्गदर्शन के लिए माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के मंत्री संजय चतुवेर्दी 29 जनवरी को शिवपुरी, इलाहाबाद में जगतगुरु शंकराचार्य से भेंट करेंगे।
संस्थाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि शंकराचार्य जी द्वारा दिए गए निदेर्शों का पूरी निष्ठा और एकजुटता के साथ पालन किया जाएगा। इस प्रेस वार्ता में गिरधारी लाल पाठक, नवीन नागर, लाला पहलवान, शिवकुमार चतुवेर्दी, अनिल पमपम और नीरज चतुवेर्दी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।




