इंद्रेश महाराज की बात पर ठहाके लगाकर हंसे प्रेमानंद महाराज:बोले- भगवान को अपनापन पसंद है

मथुरा । वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम में कथा वाचक इंद्रेश महाराज पहुंचे। बरसाना में भगवान गिरधर लाल जी के विवाह उत्सव के बाद आज वे आश्रम में आशीर्वाद लेने आए। यहां पहुंचते ही सबसे पहले उन्होंने प्रेमानंद महाराज को दंडवत प्रणाम किया, फिर उनको राधा रानी की प्रसादी चुनरी ओढ़ाई। इस दौरान इंद्रेश महाराज ने कहा- अब राधा गिरधर लाल जी आवेंगे पहले, तो गिरधर लाल जी आते। तो अब हम भी चतुर्भुज हो गए। यह सुनते ही संत प्रेमानंद महाराज जोर-जोर से हंसने लगे।
यहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। भगवान गिरधर लाल और राधा के हुए विवाह उत्सव की जानकारी दी। इस दौरान इंद्रेश महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज को भगवान राधा गिरधर लाल का छवि चित्र भी सौंपा। छवि चित्र को देखकर संत प्रेमानंद महाराज ने कहा- राधा गिरधर लाल की जय हो। फिर उसे अपने मस्तक से लगा लिया।
मुलाकात के दौरान इंद्रेश महाराज ने कहा- घर में उनके राधा माधव प्रभु की सेवा होती है। भगवान के विवाह में हल्दी, मेंहदी, जयमाल, फेहरा,नरंग महल सभी रस्में हुई। इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने सवाल किया कि सेहरा किसके बंधा। इस पर इंद्रेश महाराज ने कहा- भगवान राधा माधव प्रभु के ही बंधा।
संत प्रेमानंद महाराज ने इंद्रेश महाराज से कहा- इसी में चित्त जोड़ना है। ठाकुर जी को जो पसंद है वह है अपनापन। बड़े भक्तों में देखा गया प्रियता मेरे ठाकुर, जहां भावता उठा, वह अपनेपन तक पहुंच गया। वही भगवान को आकर्षित करता है।
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा- इसी आसक्ति से भगवान का कृपा प्रसाद प्राप्त कर सकते हैं। इसीलिए ऐसे भक्तों को रसिक संज्ञा दी गई है। जो साधना क्रिया, तपस्या क्रिया आदि से दूर हैं। इस दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने भगवान राधा कृष्ण के नवल किशोर रूप का पदों के माध्यम से बखान किया।
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा- प्रियतम और प्यारी यह हमारे दो नेत्र हैं। इनमें कौन प्रिय है कहा नहीं जा सकता। दोनों से देखने पर दोनों एक नजर आते हैं। प्रिया जी और प्यारी जी एक हैं। राधा बिना कृष्ण और कृष्ण बिना राधा अलग रह ही नहीं सकते। संत प्रेमानंद ने कहा- यह बड़ी कृपा होती है जब इनके सुख की चाह प्रगट होती है। इनसे अपने सुख की चाह करने वाले तो लाखों भक्त हैं।




