अंतरराष्ट्रीय

वेनेजुएला में भयानक त्रासदी, चौथाई आबादी के सामने गंभीर संकट

नई दिल्ली वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के अमेरिका द्वारा अपहरण किए जाने के बाद देश के अंदर स्थितियां लगातार विकट होती जा रही हैं। लगभग तीन करोड़ की आबादी वाले वेनेजुएला के 79 लाख लोगों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। लोगों के सामने खाद्यान्न से लेकर दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पाने का संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला में यथाशीघ्र परिस्थितियां सामान्य करने और देश के अंदर मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील की है।
दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणिक तेल भंडार (306 बिलियन बैरल) होने के बाद भी अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला इस समय केवल नौ लाख बैरल तेल प्रतिदिन बेच पाता था। इसके कारण वेनेजुएला के अंदर आर्थिक परेशानी पहले से ही मौजूद थी। लेकिन निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद इसमें और अधिक अनियमितता आ गई है और केवल तीन-चार दिनों के अंदर ही लोगों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
इस दक्षिण अमेरिकी देश के प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के कारण एक बड़ी आबादी के सामने पहले ही आर्थिक संकट बना हुआ था। लेकिन नए माहौल से पैदा हुई अनिश्चितता ने इसे और अधिक बढ़ाने का काम किया है। अब वेनेजुएला की तेल कंपनियों पर किसका अधिकार होगा और इसकी कमान किनके हाथों में होगी, इस पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। लिहाजा इन कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने भी अपने भविष्य को लेकर संकट बना हुआ है।
अमेरिका की टेढ़ी नजर का ही परिणाम कहा जा सकता है कि वेनेजुएला में मानवीय संकट देखने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में बताया है कि पिछले वर्ष वेनेजुएला में मानवीय सहायता के लिए 60 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए अपील की गई थी। लेकिन अपेक्षा से उलट वेनेजुएला के लिए केवल 17 प्रतिशत धन ही जुटाया जा सका।
अमेरिका से वेनेजुएला के मामले में दोहरा स्टैंड देखने को मिल रहा है। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष कहा है कि वह वेनेजुएला पर कब्जा करने का इरादा नहीं रखता है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार वेनेजुएला की तेल कंपनियों पर अमेरिकी कंपनियों का नेतृत्व होने की बात कहते रहे हैं। उन्होंने नवनियुक्त अंतरिम राष्ट्रपति से भी अमेरिका से मिलजुलकर काम करने, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही है। इसे सीधे तौर पर धमकी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अंतरिम राष्ट्रपति ने वेनेजुएला की संप्रभुता बनाए रखने और अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए काम करने की बात कही है। लेकिन अमेरिका के रुख ने वेनेजुएला का संकट और अधिक बढ़ा दिया है।
सोमवार को संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला के मामले को देखते हुए एक आपात बैठक की है। इस बैठक में वेनेजुएला की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। स्वयं वेनेजुएला ने अमेरिकी दखल को संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि किसी संप्रभु देश में इस तरह की दखल या धमकी देना संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के खिलाफ है। हालांकि, इसके बाद भी वेनेजुएला से अमेरिकी दखल को पूरी तरह खत्म करने के लिए किसी ठोस पहल के न होने से लोगों को निराशा हुई है।
संयुक्त राष्ट्र की राजनीतिक एवं शांति निर्माण मामलों की प्रमुख रोजमैरी डिकार्लो ने कहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी हस्तक्षेप को संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया है। इससे अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति को गंभीर खतरा हो सकता है। डिकार्लो ने जोर देकर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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