थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर सिर्फ संथानकूडू उर्स की अनुमति; कार्तिगई दीपम विवाद के बाद अदालत का फैसला

चेन्नई । मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित हजरत सुल्तान सिकंदर बदुशा दरगाह में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यहां केवल संथानकूडू उर्स पर्व आयोजित किया जा सकेगा और इसमें अधिकतम 50 लोगों की ही भागीदारी होगी।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि 6 जनवरी को होने वाले संथानकूडू उर्स के लिए ही अनुमति दी जाएगी, जैसा कि वर्ष 2023 में किया गया था। सरकार ने यह भी साफ किया कि कंधूरी महोत्सव की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, आयोजन के दौरान पशु बलि, मांस या मांसाहारी भोजन ले जाने और पकाने की अनुमति नहीं होगी। मामले में आगे की सुनवाई के लिए अदालत ने 20 जनवरी की तारीख तय की है।
गौरतलब है कि पिछले महीने संथानकूडू उत्सव के झंडारोहण को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि अदालत के आदेश के अनुसार तमिल माह कार्तिगई में पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाया जाए। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दीप स्तंभ पर दीप प्रज्ज्वलन के आदेश के बाद दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया था, जो झड़प में बदल गया। हालात बिगड़ने के मद्देनजर राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी थी। विवाद के बीच मदुरै में एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने आत्मदाह कर लिया था। वह कार्तिगई दीपम न जलाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहा था। इस घटना के बाद मामला और संवेदनशील हो गया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने इस घटना की निंदा करते हुए डीएमके सरकार पर ‘हिंदू विरोधी’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया। वहीं, डीएमके समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव भी पेश किया है।




