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छोटे पेट्रोल वाहनों को कैफे छूट का टाटा मोटर्स ने किया विरोध, ईवी और सुरक्षा पर असर की चेतावनी

नई दिल्ली । ईंधन दक्षता से जुड़े कॉपोर्रेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी  (कैफे) मानकों में छोटे पेट्रोल वाहनों को छूट देने के प्रस्ताव पर टाटा मोटर्स ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि इस तरह की रियायतें टिकाऊ तकनीकों पर फोकस को कमजोर कर सकती हैं। और देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा मोटर्स ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई स्थित वाहन निमार्ता ने पीएमओ में शक्तिकांत दास को लिखे अपने पत्र में कहा है कि 909 किलोग्राम तक वजन, 1200 सीसी तक इंजन क्षमता और 4,000 मिमी तक लंबाई वाले पेट्रोल वाहनों को कैफे मानकों से छूट देना भारत में स्वच्छ और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की रफ्तार को धीमा कर सकता है। कंपनी के मुताबिक, इस तरह की छूट से उन प्रयासों को झटका लगेगा, जो भविष्य की तकनीकों में छलांग लगाने के लिए किए जा रहे हैं।
टाटा मोटर्स ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर किए गए प्रयास अब नतीजे दिखाने लगे हैं। और यात्री वाहनों की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। कंपनी का मानना है कि इस अहम मोड़ पर अगर कैफे मानकों में ढील दी गई, तो ईवी अपनाने की मौजूदा गति कमजोर पड़ सकती है और नीति की दिशा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
ईंधन दक्षता के साथ-साथ टाटा मोटर्स ने सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। कंपनी का कहना है कि अगर वजन के आधार पर छूट दी जाती है, तो इससे वाहन निमार्ता जरूरी सुरक्षा फीचर्स को हटाकर वजन कम करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। ऐसा होने पर पिछले कुछ वर्षों में वाहन सुरक्षा के क्षेत्र में हासिल की गई प्रगति को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
कंपनी ने सरकार से आग्रह किया है कि कैफे मानकों में रियायत देने के लिए आकार या वजन के आधार पर वाहनों की कोई अलग श्रेणी न बनाई जाए। टाटा मोटर्स के अनुसार, ऐसा कदम शून्य-उत्सर्जन तकनीकों की दिशा में बढ़ते कदमों, सड़क सुरक्षा और सभी वाहन निमार्ताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल के विपरीत होगा।

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