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अरविंद केजरीवाल का बयान: कांग्रेस और गांधी परिवार पर सीधा आरोप, पुरानी राजनीति की राह पर लौटे।

अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर হয়েছেন, जिससे उनकी पुरानी राजनीतिक रणनीति की याद ताजा हो गई है। उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र करते हुए गांधी परिवार की ओर निशाना साधा और भाजपा के साथ कांग्रेस की मिलीभगत का आरोप लगाया।

### दिल्ली की राजनीति में केजरीवाल का हमला

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक शैली को समझना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। वर्तमान में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह पुराने राजनीतिक तरीके की ओर लौट रहे हैं। भाजपा के साथ कांग्रेस की कथित मिलीभगत को लेकर केजरीवाल ने खुलकर अपनी बात रखी। यह एक तरह की पुनरावृत्ति लगती है, जिससे यह साफ होता है कि उनके राजनीतिक सिद्धांतों में कुछ बातें स्थायी हैं।

केजरीवाल ने यह कहा कि यदि कांग्रेस सोचती है कि वह किसी बंद कमरे में समझौता करके आम जनता को मूर्ख बना सकती है, तो यह संभव नहीं है। जनता हर बात को जानती है और वह ऐसा कुछ भी सहन नहीं करने वाली है। उन्होंने इस संदर्भ में देश की सियासी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि लोग मायावती और ओवैसी की राजनीति को भी समझते हैं, लेकिन सबसे बुरा कॉम्प्रोमाइज कांग्रेस कर रही है।

### कांग्रेस का मौजूदा हालात

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुलेआम भाजपा से गठजोड़ कर रही है, जबकि उनकी पार्टी ने हमेशा से भ्रष्टाचार और सफाई की राजनीति की बात की है। उन्होंने कहा, “क्या यह सच नहीं है कि नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है?” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने भाजपा के साथ सबसे अधिक समझौता किया है। उनकी बातों में एक प्रकार की नाराजगी और चिंता दोनों झलक रही हैं।

### डोनाल्ड ट्रंप पर हमला

अरविंद केजरीवाल ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका हमारे सामान पर 50% टैरिफ लगाता है, तो हमें भी इस पर ठोस जवाब देना चाहिए। भारत को भी अमेरिका पर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नरेंद्र मोदी इस कार्य को नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम कपास किसानों की सुरक्षा के लिए अमेरिका से आयात पर 11% ड्यूटी वापस लगाना चाहिए।

### निष्कर्ष

इस प्रकार, केजरीवाल का राजनीतिक प्लेटफॉर्म हमेशा से ही अपने विरोधियों पर सीधा और तीखा प्रहार करने का रहा है। चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा, उनकी हर टिप्पणी में एक निश्चित रणनीति का पालन किया जाता है। इस बार भी उनकी बातें देश में एक नई हलचल पैदा कर सकती हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी इस रणनीति का क्या प्रभाव पड़ता है और क्या वे अपने पिछले सफल चुनावी नतीजों को दोहरा पाएंगे या नहीं।

अरविंद केजरीवाल की राजनीति में मिलीभगत और दोहरी नीति पर हमला हमेशा से एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। उनकी बातें दरअसल एक बड़ा सवाल उठाती हैं कि क्या भारतीय राजनीति में वास्तव में ईमानदारी और नैतिकता की कोई जगह है या नहीं। यह सुनहरा अवसर है कि जनता अपने नेताओं से सवाल करे और उनके कार्यों का मूल्यांकन करे।

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