मोटा गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी समारोह: भव्य प्रसाद और सजावट के साथ महारती का आयोजन, मथुरा

मथुरा न्यूज – गणेश चतुर्थी पर फूलों के बंगले और चप्पन भोग की पेशकश
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मथुरा के अथखम्बा क्षेत्र में स्थित प्राचीन मोटा गणेश मंदिर में भव्य फूल बंगला सजाया गया। इस विशेष अवसर पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश को चप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया।
सुबह के समय, गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराया गया और शाम को महाभिषेक का आयोजन किया गया। महाअर्चना के बाद, भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। इस धार्मिक आयोजन में मंदिर ट्रस्ट के सचिव, श्यामसंडर शर्मा, सेवायत राधरमन शर्मा और मनीष शर्मा ने सभी भक्तों के लिए प्रार्थना की।
इस विशेष समारोह में अध्यक्ष ब्रिज बिहारी शर्मा, गोपाल वासिष्ठ, डॉ. रामकुमार शर्मा, सतीश गोस्वामी एडवोकेट, कन्हैया लाल शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। श्री रंगलक्ष्मी अदर्श संस्कृत कॉलेज में भी गणेश चतुर्थी महोत्सव का आयोजन किया गया।
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल आनंद ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से संस्कृत और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। यह कार्यक्रम बच्चों में नई ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ उन्हें भविष्य को बेहतर बनाने के लिए देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करता है।
गणेश चतुर्थी का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक भी है। इस दिन श्रद्धालु घरों में भी गणेश जी की गणेश प्रतिमा स्थापित करके उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर में आयोजित इस समारोह के दौरान भक्तों ने गुलाब, चंपा, और अन्य सुगंधित फूलों से फूल बंगला सजाया। यह सजावट विशेष रूप से चौंकाने वाली थी, जिसने सभी उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्तों ने फूलों के बीच भगवान गणेश को देखकर न केवल खुशी का अनुभव किया, बल्कि उनकी कृपा का आशीर्वाद भी मांगा।
भोजन के भोग में विभिन्न प्रकार के पकवान शामिल थे, जैसे मोदक, लड्डू, चावल, दाल, सब्जियाँ और विभिन्न स्वादिष्ट मिठाइयाँ। विशेष रूप से, चप्पन भोग का प्रसाद भक्तों के लिए एक विशेष अनुभव था। यह भोग भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।
इस उत्सव का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह हमें एकजुटता और सद्भाव का संदेश भी देता है। गणेश चतुर्थी का पर्व सभी के लिए मिल-जुलकर मनाने का एक उत्सव है। इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर उल्लासपूर्ण वातावरण का निर्माण करते हैं और अपने-अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना करके उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
गणेश चतुर्थी के इस पर्व पर मथुरा की धरती पर भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। लोग दूर-दूर से आए होते हैं, और इस पवित्र स्थान पर इतने बड़े आयोजन का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक रहते हैं। यह उनके श्रद्धा और आस्था का प्रतीक होता है।
इस विशेष अवसर पर पुष्प decoration, भोग की विविधता, और श्रद्धालुओं की भागीदारी से समृद्ध वातावरण का निर्माण होता है। भक्तजन पूरे मन से भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।
गणेश जी का ये विशेष पर्व समाज में नकारात्मकताओं को दूर कर सकारात्मकता का माहौल बनाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, और भक्तों के मन में यह विश्वास होता है कि उनका आशीर्वाद हर प्रकार की बाधाओं को दूर कर सकता है।
गणेश चतुर्थी का पर्व केवल एक धार्मिक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी का यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें एकजुटता, प्रेम और मैत्री का भी पाठ पढ़ाता है। जब हम एक सामान्य उद्देश्य के लिए इकट्ठा होते हैं, तो हम समाज को मजबूत बनाते हैं और एक नई दिशा की ओर बढ़ते हैं।
मंदिर में आयोजित इस समारोह का उद्देश्य लोगों को जोड़ना और उन्हें एक सकारात्मक दिशा में ले जाना है। यह हमें याद दिलाता है कि हम सभी एक समाज का हिस्सा हैं और हमें एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।
भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस पर्व का ध्यान रखना नितांत आवश्यक है। यही कारण है कि हर वर्ष लोग इस अवसर का बड़ी धूमधाम से स्वागत करते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर इसका आनंद लेते हैं।
जब हम गणेश जी की पूजा करते हैं, तो हम अपनी नकारात्मक सोच को भी सकारात्मकता में परिवर्तित करते हैं। इस दिन की गई पूजा और प्रार्थना न केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करती है।
गणेश चतुर्थी का त्यौहार हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयों का सामना करने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा। यही गणेश जी की सच्ची आराधना है। इस पर्व को मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि हम एक मात्र का भाव रखें और आपस में प्रेम बाँटें।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे, और एकता का पर्व है। यह हमें याद दिलाता है कि हम सभी साथ हैं, चाहे हालात कैसे भी हों। भगवान गणेश की कृपा से हम हमेशा हर बाधा को पार कर सकते हैं और एक सफल एवं खुशहाल जीवन का अनुभव कर सकते हैं।
इस त्यौहार की धूमधाम और भव्यता हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में भी इसी प्रकार की सकारात्मकता लाएँ। गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में हमें चाहिए कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएँ और समाज में एकता और सामंजस्य का माहौल बनायें। यह त्यौहार हम सभी को एक साथ लाने का प्रयास करता है।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी का पर्व हमें सिखाता है कि यदि हम एकजुट होकर चेष्टा करें, तो किसी भी कठिनाई का सामना आसानी से कर सकते हैं। इसकी महत्ता कभी कम नहीं होती। यह हमेशा हमारे दिलों में बसी रहेगी और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
गणेश चतुर्थी का यह त्योहार केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि जीवन के सब पहलुओं में एकता, प्रेम और सकारात्मकता का प्रतीक है। जब हम सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं, तो वे हमें अपनी कृपा से हर बाधा को पार करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
गणेश चतुर्थी का यह पर्व हर वर्ष हम सबको एक नई शुरुआत, नयी आशा और नयी दिशा का आशीर्वाद देता है। यह एक बहुत बड़ा अवसर है, जब हम अपने परिवार, दोस्तों और समाज के साथ मिलकर भक्ति भाव से गणेश जी की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
आइए, इस गणेश चतुर्थी पर हम सभी मिलकर भगवान गणेश से प्रार्थना करें कि वे हमारे जीवन को खुशियों से भर दें और हमें सद्भाव, स्नेह और एकता का पाठ पढ़ाएँ। गणेश चतुर्थी की सभी को शुभकामनाएँ!