इस साउथ फिल्म ने 550 बार रिलीज होकर 75 लाख के बजट में भारी मुनाफा कमाया।

साउथ सिनेमा हमेशा बेहतरीन फिल्म्स के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करता आया है। इस उद्योग का इतिहास भी काफी समृद्ध है। इस आधार पर हम आपको एक ऐसी दक्षिण भारतीय फिल्म के बारे में बताएंगे जो 550 बार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।
### री-रिलीज का ट्रेंड
इस समय सिनेमा जगत में फिल्मों की री-रिलीज का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई पुरानी फिल्में समय-समय पर सिनेमा हॉल में दोबारा दिखाई जा रही हैं। इसमें साउथ सिनेमा की कई फिल्मों का भी नाम शामिल है। लेकिन एक फिल्म ने इस मामले में अद्वितीय रिकॉर्ड बना लिया है।
इस फिल्म को एक बार नहीं, बल्कि 550 बार बड़े पर्दे पर रिलीज किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह फिल्म लगभग 30 साल पुरानी है, और आज भी दर्शक इसे देखना पसंद करते हैं। चलिए जानते हैं कि वह फिल्म कौन सी है।
### फिल्म का अनोखा रिकॉर्ड
पुरानी फिल्मों को दोबारा देखना ज्यादातर लोगों को पसंद आता है। लेकिन जब आप अपनी पसंदीदा फिल्म को थिएटर में देखते हैं, तो वह अनुभव दोगुना हो जाता है। इस संदर्भ में कन्नड़ फिल्म “ओम” का नाम सामने आता है। यह फिल्म 1995 में पहली बार थिएटर्स में रिलीज हुई थी। निर्देशक उपेंद्र के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक गैंगस्टर ड्रामा थी, जिसमें थ्रिलर तत्वों को भी शामिल किया गया था। इसकी कहानी और दमदार एक्शन ने दर्शकों को काफी आकर्षित किया।
आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक यह फिल्म 550 बार सिनेमाघरों में री-रिलीज हो चुकी है। 30 साल में इस प्रकार से इतने अधिक बार रिलीज होकर इस फिल्म ने एक अद्वितीय रिकॉर्ड बनाया है। सिर्फ बेंगलुरू में, कपाली सिनेमाघर में ही ओम को 30 से अधिक बार री-रिलीज किया जा चुका है। इस उपलब्धि के बारे में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उल्लेख किया गया है।
शिव राजकुमार और प्रेमा स्टारर इस फिल्म की कहानी बेंगलुरू में चल रहे अंडरवर्ल्ड नेटवर्क पर आधारित थी। आज के समय में इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है, जिसमें दर्शकों के बीच में विशेष उत्साह और क्रेज दिखाई देता है। इतना ही नहीं, ओम शिव राजकुमार के अभिनय करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक मानी जा रही है।
### मध्यम बजट में शानदार कमाई
कहा जाता है कि शिव राजकुमार की “ओम” का बजट केवल 75 लाख रुपये था। पहले रिलीज के साथ-साथ री-रिलीज से इस फिल्म ने अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया है। यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि कमर्शियल तौर पर “ओम” ने अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं।
इस फिल्म की सफलता का यह सफर दर्शकों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक मानकों का भी परिभाषा देता है, जहां आनंद और प्रेम के तत्वों को बहुत अच्छे से दर्शाया गया है। “ओम” ने केवल एक फिल्म ही नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव दिया है जिसकी यादें दर्शकों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी।
साउथ सिनेमा न केवल मनोरंजन का एक साधन है, बल्कि यह एक कल्चरल आइकॉन भी बन चुका है। आज, जब हम अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हैं, तो फिल्म “ओम” निश्चित रूप से इन यादों में एक अहम स्थान रखती है। इसकी कहानी, डायरेक्शन, और अभिनय ने इसे एक स्थायी भूमि पर स्थापित कर दिया है, और अब दर्शक इसे देखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं।
इस प्रकार, “ओम” एक मिसाल बन गई है कि कैसे अच्छी कहानी और अद्भुत प्रदर्शन एक फिल्म को अमर बना सकते हैं। यह न केवल दक्षिण सिनेमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह पूरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है।
अब, जब भी हम पुराने फिल्मों की बात करते हैं, “ओम” का ज़िक्र सुनिश्चित रूप से आता है, और इसका प्रभाव हमेशा दर्शकों पर बना रहेगा। निश्चित रूप से, यह फिल्म साउथ सिनेमा की एक अनमोल धरोहर बनी हुई है, और हम सभी इसे कभी न भूल सकेंगे।