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सामाजिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को तोड़ रहा है संघ: दिग्विजय – Dixit Times
अंतरराष्ट्रीयताजा खबर

सामाजिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को तोड़ रहा है संघ: दिग्विजय

नई दिल्ली।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक ताने बाने को तोडऩे का प्रयास करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा किलोगों को संघ के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, यही बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सिंह ने राजीव गांधी स्टडी सर्किल द्वारा संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती पर उनके योगदान को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सभी लोगों को सोशल मीडिया पर आकर आरएसएस के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बाबा साहब को सिर्फ सामाज सुधारक के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें एक अर्थशास्त्री के रूप में भी देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनके योगदान से ही देश का वित्तीय आधार मजबूत और सुरक्षित हो सका है।

उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर ने अपनी लड़ाई सिर्फ समाज के दबे कुचले एक वर्ग विशेष के हितों के लिए नहीं लड़ी बल्कि उन्होंने सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोगों की लड़ाई लड़ी। बाबा साहब महान विद्वान, महिलाओं के हितों के संरक्षक, राष्ट्रभक्त और एक अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने देश के आर्थिक हालात सुधारने के लिए गांवों के विकास पर बल दिया और देश के हर नागरिक को गरीबी तथा तनाव से दूर रखने का प्रयास किया।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. अम्बेडकर के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों ने पृथक पृथक पृष्ठभूमि में जन्म लिया। पंडित नेहरू प्रभावशाली परिवार में जन्मे थे, जबकि अम्बेडकर ने एक दलित के घर जन्म लिया था।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश को आजादी मिलने के बाद, जब संविधान लिखने के बारे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित नेहरू तथा सरदार पटेल के बीच विचार विमर्श हुआ तो तीनों लोग डॉ अम्बेडकर के नाम पर एकमत हो गए।

इस तरह से दलित के घर में जन्मे अम्बेडकर ने समाज की उस परंपरा को तोड़ दिया, जिसके अनुसार पंडित का बेटा पंडित और दलित का बेटा पिता वाला काम ही करेगा। संविधान निर्माण के लिए डॉ अम्बेडकर ने अमरीकी साम्राज्यवादी व्यवस्था के बजाए रूसी समाजवाद का मॉडल अपनाया और अर्थव्यवस्था की रीढ माने जाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने पर बल दिया।

उनका कहना था कि संघ ही एक मात्र संगठन है जो बाबा साहब के विचारों के खिलाफ रहा है। यह एक मात्र संगठन है जो पंजीकृत नहीं है, लेकिन भाजपा तथा सरकार को चला रहा है।

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