अंतरराष्ट्रीय

ताइवान की विपक्षी नेता से मिले शी जिनपिंग, ट्रंप के चीन दौरे से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल

चीन और ताइवान संबंधों के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बीजिंग में ताइवान की विपक्षी नेता चेंग ली-वुन से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अगले महीने डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा प्रस्तावित है।
चेंग ली-वुन, ताइवान की प्रमुख विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग की पहली अध्यक्ष हैं, जिन्होंने एक दशक में पहली बार पार्टी प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन का दौरा किया है। उनका यह दौरा एक सप्ताह का है और इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और वन चाइना नीति के तहत उसके पुनर्एकीकरण पर जोर देता रहा है। वहीं ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी चीन के इस रुख का कड़ा विरोध करती है और ताइवान की अलग पहचान बनाए रखने की पक्षधर है। इसके विपरीत ङटळ चीन के साथ करीबी संबंधों की वकालत करती रही है, जिससे यह मुलाकात और भी अहम हो जाती है।
बीजिंग रवाना होने से पहले चेंग ने अपने दौरे को शांति की यात्रा बताया और कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है, जहां स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को संवाद और सहयोग के जरिए मतभेद सुलझाने चाहिए।
अमेरिका ताइवान को 11 अरब डॉलर के रक्षा पैकेज देगा?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ताइवान को करीब 11 अरब डॉलर का बड़ा रक्षा पैकेज देने की योजना बना रहा है। इस पैकेज में ऌकटअफर रॉकेट सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइल, ड्रोन, होवित्जर और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। चीन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
वहीं ताइवान की संसद में इस रक्षा बजट को लेकर गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि विपक्षी दलों के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसी बीच हाल ही में अमेरिका का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ताइपेई पहुंचा और संसद से रक्षा बजट पारित करने की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की 14-15 मई को प्रस्तावित चीन यात्रा के दौरान ताइवान का मुद्दा प्रमुख रूप से चर्चा में रहेगा। ऐसे में शी-चेंग की यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से अहम है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है।

Related Articles

Back to top button