नेपाल: बालेंद्र शाह के सरकार में आते ही तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ तेज हुई जांच

काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के विरोध में तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहे। वहीं, अधिकारियों ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ जांच तेज कर दी है। ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। उन पर पिछले साल 8 और 9 सितंबर को हुई जेन-जी आंदोलन को दबाने को आरोप है। इस आंदोलन के दौरान दो दर्जन युवाओं समेत 76 की मौत हुई थी।
ये गिरफ्तारियां तब हुईं, जब नई बनी बालेंद्र शाह सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जेन-जी विरोध प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया। सोमवार सुबह ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत माक्सवादी-लेनिनवादी) और उसके सहयोगी संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता नया बनेश्वर इलाके में एकत्र हुए थे। कार्यकर्ता ‘केपी ओली को तुरंत रिहा करो’ और ‘बदले की राजनीति बंद करो’ जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। शनिवार व रविवार को हुए प्रदर्शनों में झड़पें हुई थीं।
इसी बीच, नेपाल के धनशोधन जांच विभाग और पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के खिलाफ जांच तेज कर दी है। यह कार्रवाई पूर्व मंत्री दीपक खडका की गिरफ्तारी के बाद की गई है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, विस्तृत जांच शुरू करने से करीब छह महीने पहले शुरूआती जांच की गई थी। इस दौरान हेराफेरी पाए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
पूर्व ऊर्जा मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता दीपक खडका को धनशोधन मामले में रविवार को गिरफ्तार किया गया था। स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायत के बाद उन्हें रविवार को महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन पर आरोप है कि ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री रहते हुए उन्होंने लाइसेंस और ठेके दिलाने के बदले आर्थिक लाभ लिया। पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान खडका और पूर्व प्रधानमंत्रियों देउबा और दहल के घरों पर जले हुए नोटों के टुकड़ों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनकी बाद में फोरेंसिक जांच में पुष्टि भी हुई थी।




