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लंदन हाईकोर्ट ने नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज की, कहा- भारत के आश्वासन पर भरोसा

नई दिल्ली । लंदन हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने की याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला भारत सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों की गुणवत्ता पर आधारित था। मोदी पंजाब नेशनल बैंक के 13,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में भारत में वांछित है। उसने संजय भंडारी के मामले के आधार पर अपनी याचिका दायर की थी।
भगोड़े आर्थिक अपराधी संजय भंडारी के मामले में भारतीय एजेंसियों द्वारा यातना की संभावना पर प्रत्यर्पण रद्द कर दिया गया था। लंदन उच्च न्यायालय ने मानवाधिकारों के आधार पर भंडारी को प्रत्यर्पण आदेश से मुक्त कर दिया था। उच्च न्यायालय की पीठ में लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जय ने नीरव मोदी का मामला फिर से खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने भारत सरकार के नोट वर्बल में दिए गए आश्वासनों पर भरोसा किया।
अदालत ने कहा कि यदि भारत सरकार के आश्वासन नहीं होते, तो वे अपील को फिर से खोलने पर विचार कर सकते थे। पीठ ने मुंबई में जेल से अदालत तक यात्रा के दौरान यातना के वास्तविक जोखिम के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने भारत और ब्रिटेन के बीच आपसी विश्वास और संधि समझौतों को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, मोदी के वकील फिट्जगेराल्ड ने कुछ हलफनामे के सबूतों पर सवाल उठाए थे।
भारत सरकार के आश्वासन में क्या कहा गया है?
पीठ ने कहा कि भारत सरकार के आश्वासन कुछ भी गड़बड़ या अस्पष्टता नहीं हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नीरव मोदी को आर्थर सड़क जेल में रखने की विस्तृत योजना भेजी थी। इसमें उसे मिलने वाली सुविधाएं और मुकदमे के दौरान कानूनी सहायता शामिल थी। ये आश्वासन गृह मंत्रालय के एक सक्षम अधिकारी की ओर से दिए गए थे। ये आश्वासन भारत सरकार, महाराष्ट्र राज्य और पांच जांच एजेंसियों पर बाध्यकारी हैं। अदालत ने कहा कि भारत यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, पर भारतीय कानून में यातना की अनुमति नहीं है।
भारत के आश्वासन गलत साबित हुए तो क्या होगा?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ये आश्वासन राजनयिक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं। किसी भी उल्लंघन के परिणाम भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों के लिए अत्यंत हानिकारक होंगे। विशेषकर नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्ति के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकील ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) टीम की सहायता से मोदी की याचिका के खिलाफ मजबूती से तर्क दिए। सीबीआई के जांच अधिकारियों सहित एक टीम सुनवाई के लिए लंदन गई थी।
सीबीआई की पूरे मामले में क्या भूमिका रही?
सीबीआई प्रवक्ता ने 25 मार्च को एक बयान में कहा कि यह याचिका भंडारी से जुड़े मामले में फैसले के आधार पर दायर की गई थी। सीबीआई के लगातार प्रयासों से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया गया। सीबीआई 2018 से पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। ब्रिटेन की अदालतों ने 2019 में उसकी गिरफ्तारी के बाद मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। उन्होंने उसकी पिछली अपीलों को खारिज कर भारत में उसके साथ व्यवहार के आश्वासनों को स्वीकार किया था। मोदी ने कथित तौर पर अपने चाचा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर बैंक को धोखा दिया है। वह 19 मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में है। प्रवक्ता ने बताया कि मोदी ने अकेले 6,498.20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।

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