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पहली बार नौकरी की तलाश में निकले युवाओं के लिए खुशखबरी, नियोक्ता दे सकते हैं फ्रेशर्स को प्राथमिकता – Dixit Times
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पहली बार नौकरी की तलाश में निकले युवाओं के लिए खुशखबरी, नियोक्ता दे सकते हैं फ्रेशर्स को प्राथमिकता

नई दिल्ली । पहली बार नौकरी की तलाश में निकले युवाओं के लिए यह साल अच्छा साबित हो सकता है। 73 प्रतिशत नियोक्ता पहली छमाही में फ्रेशर्स को नौकरी पर रखने की योजना बना रहे हैं। टीमलीज एडटेक करियर की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भार्ती संबंधी निर्णय मुख्य रूप से इंटर्नशिप और वास्तविक दुनिया के प्रोजेक्ट अनुभव से प्रेरित होते हैं, न कि केवल शैक्षणिक योग्ताओं से। इसमें कहा गया है कि लगभग 4 में से 3 नियोक्ता फ्रेशर्स को नियुक्त करने का इरादा रखते हैं। यह पिछले छमाही की तुलना में तीन प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है। यह डेटा नवंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच सर्वेक्षण किए गए 1,051 नियोक्ताओं से लिए गए इनपुट पर आधारित है।
टीमलीज एडटेक के संस्थापक और सीईओ शांतनु रूज ने कहा कि हम देख रहे हैं कि युवा प्रतिभाओं के कार्यबल में शामिल होने के तरीके में एक संरचनात्मक बदलाव आ रहा है। इस छमाही में फ्रेशर्स को नौकरी देने की इच्छा 73 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जो प्रवेश स्तर की प्रतिभाओं में नियोक्ताओं के सतर्क लेकिन स्पष्ट विश्वास को दशार्ती है। कुछ क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है – खुदरा क्षेत्र में भर्ती की इच्छा 50 प्रतिशत अंक बढ़कर 2025 की पहली छमाही में 41 प्रतिशत से 2026 की पहली छमाही में 91 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने कहा कि यात्रा क्षेत्र में 51 अंकों की वृद्धि हुई है, जो 26 प्रतिशत से बढ़कर 77 प्रतिशत हो गया है। बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में 50 अंकों की वृद्धि हुई है, जो 22 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत हो गया है, जो युवा पेशेवरों की मांग में मजबूत उछाल का संकेत देता है। फिर भी, उन्होंने कहा कि अवसर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन उन तक पहुंच अधिक चयनात्मक होती जा रही है।
रूज ने आगे कहा कि आजकल असली अंतर उन उम्मीदवारों के बीच है जो व्यावहारिक कौशल प्रदर्शित कर सकते हैं और जो नहीं कर सकते। इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो या व्यावहारिक अनुभव वाले फ्रेशर्स तेजी से विकास के अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि केवल डिग्री धारक आवेदकों को नौकरी ढूंढने में लंबा समय लगता है। इसका समाधान सीखने की प्रक्रिया में कार्य-प्रदर्शन के प्रमाण को शामिल करने में निहित है।
इसके बाद मुंबई का स्थान आता है, जहां इसकी मांग 72 प्रतिशत है, जो खुदरा (91 प्रतिशत), एफएमसी (80 प्रतिशत) और स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स (52 प्रतिशत) क्षेत्रों द्वारा संचालित है, जिसमें बीआईएम समन्वय सहायक (55 प्रतिशत), डिजिटल सेल्स एसोसिएट (58 प्रतिशत) और क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट (45 प्रतिशत) की मजबूत मांग है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ये शहर मिलकर भारत में प्रवेश स्तर की भर्ती गतिविधियों के बहुमत के लिए जिम्मेदार हैं, जो फ्रेशर्स को प्रौद्योगिकी, संचालन, स्वास्थ्य सेवा और वाणिज्य क्षेत्रों में विविध अवसर प्रदान करते हैं।

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