अंतरराष्ट्रीय

कंबोडिया में फर्जी पुलिस थाने का पदार्फाश; गांधी-आंबेडकर की फोटो लगाकर भारतीयों को बनाते थे शिकार

फोनों पेन्ह । कंबोडिया में अधिकारियों ने धोखाधड़ी केंद्रों पर कार्रवाई के दौरान एक फर्जी पुलिस स्टेशन का पदार्फाश किया है, जिसमें गांधी और आंबेडकर की तस्वीर लगी हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, इसका इस्तेमाल भारतीयों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने के लिए किया जा रहा था।
मामले में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि कंबोडिया ने हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी पर नकेल कसने के अभियान में लगभग 200 घोटाले के केंद्रों को बंद किया है। वहीं इस दौरान 173 वरिष्ठ आपराधिक सरगनाओं को गिरफ्तार किया गया है और 11,000 श्रमिकों को निर्वासित किया गया है।
वियतनाम सीमा के पास कंपोट में मौजूद एक बड़े आॅफिस परिसर में, पत्रकारों को बड़े-बड़े ऐसे कमरे दिखाए गए जिनमें कंप्यूटर स्टेशनों की कतारें और डेस्क थे, वहां बड़े पैमाने पर पीड़ितों को धोखा देने के तरीके बताने वाले दस्तावेज पड़े हुए थे, इसके साथ ही फोन कॉल के लिए स्टूडियो बूथ और एक नकली भारतीय पुलिस स्टेशन भी दिखाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि कंपोट में मौजूद माय कैसीनो परिसर के अंदर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। कथित मालिक और कारोबारी ली कुओंग की गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी भाग गए। मामले में एक वरिष्ठ पुलिस ने बताया कि उनके पर्याप्त पुलिसकर्मी नहीं थे, इस वजह से वे लोग कर्मचारियों को गिरफ्तार नहीं कर सके। कम्पोट प्रांत के पुलिस प्रमुख ने कहा, ‘पूरे प्रांत में हमारे पास लगभग 1000 पुलिसकर्मी हैं, और लगभग 300 सैन्य पुलिसकर्मी हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘दोनों बलों को मिलाकर भी हम उन्हें नहीं रोक सकते क्योंकि जब वे यहां से निकले थे तब उनकी संख्या लगभग 6000 से 7000 थी।’

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