मथुरा

बांके बिहारी मंदिर में मुस्लिम को ठेका देने का विरोध:फलाहारी महाराज बोले- पहचान छिपाकर काम लिया

मथुरा । मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में मुस्लिम ठेकेदार को रेलिंग लगाने का ठेका दिए जाने का विरोध शुरू हो गया। हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि गोमांस खाने वाले बांके बिहारी मंदिर में आएंगे तो ब्रज वासियों को सहन नहीं होगा। रेलिंग लगाने का ठेके क्यों और किसने दिया। ठेका कैसे हासिल किया गया, इसकी जांच कराई जाए। जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने सीएम योगी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने ठेका निरस्त करने की मांग की है। कहा है कि जहां भगवान राधाकृष्ण ने महारास और माखन चोरी की लीला की हो। जहां बांके बिहारी विराजमान हों। वहां गोमांस खाने वाले, सनातन धर्म के विरोधी आएंगे तो कृष्ण कन्हैया नाराज हो जाएंगे।
दरअसल, बांके बिहारी मंदिर में भीड़ को नियंत्रित कर कतार में दर्शन कराने के लिए स्टील की रेलिंग लगाई जा रही है। रेलिंग के काम का ठेका मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। आरोप है कि इस कंपनी का मुख्य पार्टनर मुस्लिम है। हिंदू संगठन को जब इसकी जानकारी हुई तो लोग नाराज हो गए। वे ठेका निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।
फलाहारी महाराज ने कहा- यह लोग सनातन धर्म के विरोधी हैं, हिंदुओं को काफिर कहते हैं, ऐसे लोगों को मंदिर प्रांगण से 1 किलोमीटर तक घुसने नहीं दिया जाए। हमारे सनातनियों में स्टील रेलिंग लगाने के लिए हजारों ठेकेदार हैं। तो फिर हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले और मथुरा, काशी, अयोध्या को तोड़कर वहां नमाज अदा करने वाले मुगलों के वंशजों को यह ठेका क्यों दिया गया।
दिनेश फलाहारी ने कहा- पहचान छिपाकर कनिका कंस्ट्रक्शन के मालिक सलीम अहमद ने ठेका लिया है। इसकी जांच कराई जाए। ठेका निरस्त किया जाए। यह ठेका किसी सनातनी भाई को मिलना चाहिए।
बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाए जाने के मामले में हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य शैलेन्द्र गोस्वामी ने कहा- ये जानकारी नहीं है कि रेलिंग लगाने वाले कौन हैं। लेकिन बांके बिहारीजी के प्राकट्य कर्ता स्वामी हरिदास जी के दर्शन करने और संगीत सुनने के लिए तो स्वयं अकबर यहां आए थे।
इससे पहले, बांके बिहारी मंदिर के पुजारी गोस्वामियों ने बांके बिहारी में कॉरिडोर बनाने का विरोध किया था। वे अभी भी अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि कॉरिडोर बनाने से कुञ्ज गलियों की पहचान मिट जाएगी। लोग कुञ्ज गलियों को देखने के लिए यहां आते हैं। जब कुञ्ज गलियां ही नहीं रहेंगी तो यहां पर्यटक नहीं आएंगे।

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