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रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक शुरू, संतुलित विकास दर और महंगाई के बीच रेपो दर पर रहेगी नजर

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंककी मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। इस अहम बैठक का नतीजा शुक्रवार को घोषित किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्रीय बैंक बीते एक साल में मौद्रिक नीति में बड़ी नरमी कर चुका है और वैश्विक व घरेलू मोर्चे पर कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
यह वित्त मंत्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए तकनीक-केंद्रित बजट के बाद टढउ की पहली बैठक है। साथ ही, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि दोनों देशों की सरकारों ने इसकी सभी शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं। ऐसे में इस बैठक पर बाजार और नीति विशेषज्ञों की खास नजर है।
पिछले एक साल में आरबीआई ने आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के उद्देश्य से मौद्रिक नीति में उल्लेखनीय ढील दी है। फरवरी से अब तक केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की है। दिसंबर की एमपीसी बैठक में भी रेपो रेट को 25 आधार अंक घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके साथ ही फइक ने आर्थिक वृद्धि के अनुमान में भी संशोधन किया था।
महंगाई के मोर्चे पर, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई 1.33 प्रतिशत (सालाना) रही। दिसंबर 2024 की तुलना में महंगाई में यह बढ़ोतरी व्यक्तिगत देखभाल, सब्जियों, मांस-मछली, अंडे, मसाले, दालें और संबंधित उत्पादों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई। नवंबर 2025 की तुलना में दिसंबर 2025 में हेडलाइन महंगाई 62 आधार अंक बढ़ी।
आगामी तीन दिनों में सदस्य महंगाई के रुझान और आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। शुक्रवार को आने वाला फैसला यह संकेत देगा कि फइक आगे ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित और विकास की रफ्तार स्थिर बनी हुई है।

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