रक्षा क्षेत्र- सैन्य आधुनिकीकरण पर 20% खर्च बढ़ाने की उम्मीद; आॅपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ

नई दिल्ली । आतंकवाद के खिलाफ आॅपरेशन सिंदूर के पहले चरण की रणनीतिक सफलता के बाद सरकार इस बार सबसे एक्शन ओरिएंटेड रक्षा बजट पेश करने जा रही है। यह सिर्फ सैन्य आवंटन नहीं, बल्कि भारत की आॅफेंसिव-डिफेंस नीति का आर्थिक घोषणापत्र होगा, जो स्पष्ट करेगा कि आॅपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और सेनाएं भविष्य की किसी भी स्ट्राइक के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में, रक्षा मंत्रालय ने इस बार सैन्य आधुनिकीकरण पर 20 फीसदी अधिक आवंटन का रोडमैप तैयार किया है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के हालिया संकेतों के अनुसार, आॅपरेशन सिंदूर के दौरान सेनाओं की कुछ तकनीकी कमियां सामने आई हैं। बजट में इन्हें दूर करने के लिए विशेष प्रावधान होंगे।?सरकार का ध्यान ऐसे जीपीएस-मुक्त ड्रोन निर्माण पर है, जो दुश्मन की जैमिंग के बावजूद सटीक प्रहार कर सकें। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रौद्योगिकी व ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए मजबूत स्वदेशी ईको-सिस्टम का निर्माण प्राथमिकता होगी।
चार प्राथमिकताएं
स्वदेशी ड्रोन ईको-सिस्टम: बिना जीपीएस और जैमिंग-मुक्त ड्रोन निर्माण के लिए फंड।
एंटी-ड्रोन तकनीक: सीमाओं पर स्मार्ट फेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का विस्तार।
डाटा ग्रिड: तीनों सेनाओं को एक ही डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर त्वरित प्रहार की क्षमता।
फ्यूचर वेपन्स: निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) और एआई आधारित रक्षा प्रणाली।
डाटा सेंट्रिसिटी और नेटवर्किंग का साल
सेना ने आने वाले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका असर बजट में दिखेगा, जहां डाटा को एक रणनीतिक संसाधन माना जाएगा। सेंसर, ड्रोन, सैटेलाइट और मैदान में तैनात सैनिकों को एक ही डिजिटल ग्रिड से जोड़ा जाएगा, जिससे कमांडर्स कुछ ही पलों में सटीक निर्णय ले सकें। उन्नत रक्षा प्रणाली पर निवेश बजट का आकर्षण होगा।



