भारत ने की गाजा संघर्ष सुलझाने के प्रयासों के लिए अमेरिका की तारीफ

संयुक्त राष्ट्र । इस्राइल और हमास के बीच चल रही जंग में हजारों की संख्या में लोगों की जान गई है। इस संघर्ष में गाजा पूरी तरह तबाह हो गया। हालांकि अमेरिका के प्रयासों के चलते करीब दो साल से जारी जंग अब थम चुकी है और संघर्ष विराम की घोषणा भी की गई, लेकिन बीच-बीच में बमबारी की घटनाएं सामने आती रहती है। इस बीच गाजा में शांति समझौता दूसरे चरण में पहुंच गया है। ऐसे में भारत ने अमेरिका के इस कदम की सराहना की है।
भारत ने गाजा में ‘लंबे समय से चले आ रहे’ संघर्ष को संबोधित करने के लिए अमेरिका की तारीफ की। नई दिल्ली ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के कार्यान्वयन के संबंध में हाल ही में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। जिसमें बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने हिस्सा लिया।
परवथानेनी हरीश ने मध्य पूर्व की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में अपने संबोधन में कहा कि गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के कार्यान्वयन के संबंध में हाल ही में हुई प्रगति पर भारत का ध्यान है। भारत इस अवसर पर इस दीर्घकालिक मुद्दे को सुलझाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति आभार भी व्यक्त करता है।
पिछले साल नवंबर में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 29 सितंबर की ‘गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना’ का समर्थन किया, जिसमें कहा गया है कि ‘गाजा एक आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र होगा जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा नहीं पैदा करेगा’ और गाजा के लोगों के लाभ के लिए इसका पुनर्विकास किया जाएगा।
इस प्रस्ताव में एक ‘शांति बोर्ड’ (बीओपी) की स्थापना का भी स्वागत किया गया, जो एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यक्तित्व वाला “संक्रमणकालीन प्रशासन” होगा और व्यापक योजना के अनुसार गाजा के पुनर्विकास के लिए ढांचा तैयार करेगा और वित्तपोषण का समन्वय करेगा।
हरीश ने कहा कि गाजा का पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार व सार्वजनिक सेवाओं और मानवीय सहायता की बहाली एक अत्यंत कठिन कार्य है, जिसके लिए फलस्तीनी भाइयों और बहनों के दर्द और पीड़ा को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘साथ ही, हमें यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि आतंकवाद का सभ्य समाजों में कोई स्थान नहीं है और इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की जानी चाहिए।’
इस बात पर जोर देते हुए कि गाजा में आवश्यक पुनर्निर्माण का पैमाना बहुत बड़ा है भारत ने कहा कि यूएनओपीएस (संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय) का अनुमान है कि गाजा में 60 मिलियन टन मलबा है। उन्होंने ने कहा, ‘मलबे में हानिकारक पदार्थ भी मौजूद हैं। इसलिए इस स्थिति से निपटने में पारंपरिक पुनर्निर्माण मॉडल सीमित साबित होंगे। तकनीकी सटीकता के साथ एक नवीन दृष्टिकोण की आवश्यकता है।’
भारत ने आगे कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति में क्रमिक सुधार हुआ है, लेकिन भीषण सर्दी और विनाश की व्यापकता इस कार्य को कठिन बनाए हुए है। इसी के साथ भारत ने सुरक्षित मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अपील भी दोहराई।




