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जलवायु परिवर्तन से दक्षिणी अफ्रीका में भीषण बाढ़, 100 से ज्यादा लोगों की मौत – Dixit Times
अंतरराष्ट्रीय

जलवायु परिवर्तन से दक्षिणी अफ्रीका में भीषण बाढ़, 100 से ज्यादा लोगों की मौत

नई दिल्ली । दक्षिणी अफ्रीका के कई हिस्सों में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने खतरनाक बना दिया है। इस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 3 लाख लोगों को अपना घर छोड़ दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ा है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन द्वारा दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक और जिÞम्बाब्वे में हुई भारी बारिश का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार, इन इलाकों में महज 10 दिनों के भीतर पूरे एक साल के बराबर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके कारण घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी लागत लाखों डॉलर आंकी जा रही है। मोजाम्बिक में कई घर और इमारतें पूरी तरह पानी में डूब गईं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के लिम्पोपो और म्पुमालांगा प्रांतों तथा जिÞम्बाब्वे के कुछ हिस्सों में सड़कें और पुल बह गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बारिश सामान्य नहीं थी। इतनी तेज बारिश आमतौर पर 50 साल में एक बार होती है, लेकिन अब ऐसे घटनाक्रम ज्यादा हिंसक हो रहे हैं। इस स्थिति को मौजूदा ला नीना मौसम प्रणाली ने और गंभीर बना दिया, जो आमतौर पर इस क्षेत्र में ज्यादा बारिश लाती है, लेकिन इस बार यह ज्यादा गर्म वातावरण में सक्रिय थी।
रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान के जलवायु शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक इजिÞदीन पिंटो ने कहा कि जीवाश्म ईंधनों के लगातार इस्तेमाल से अत्यधिक बारिश की तीव्रता बढ़ रही है। हालिया बारिश की तीव्रता में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी को जलवायु परिवर्तन के बिना समझाना संभव नहीं है। उनके अनुसार, जो बारिश पहले भी गंभीर होती, वह अब एक विनाशकारी बाढ़ में बदल गई है, जिससे निपटने के लिए लोग तैयार नहीं हैं। वैज्ञानिकों के लिए भी इस बार की बाढ़ की तीव्रता चौंकाने वाली रही।
मोजाम्बिक मौसम सेवा के शोधकर्ता बर्नार्डिनो न्हांतुम्बो ने बताया कि कुछ इलाकों में दो से तीन दिनों में उतनी बारिश हो गई, जितनी पूरे बरसाती मौसम में होती है। उन्होंने कहा कि मोजाम्बिक नौ अंतरराष्ट्रीय नदियों के निचले हिस्से में स्थित है, इसलिए भारी बारिश के साथ-साथ नदियों के तेज बहाव ने भी तबाही बढ़ा दी।
इस आपदा से मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। गाजा प्रांत की राजधानी जाइ-जाइ और पास का शहर चोक्वे लंबे समय तक पानी में डूबे रहे। अधिकारियों का कहना है कि पूवार्नुमान के बावजूद नुकसान को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं था। शोधकतार्ओं ने अफ्रीका में ही जलवायु मॉडल विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
इंपीरियल कॉलेज लंदन की प्रोफेसर फ्रिडेरिके ओटो ने कहा कि दुनिया में उपलब्ध अधिकांश जलवायु मॉडल अमेरिका, यूरोप और एशिया में विकसित किए गए हैं। अफ्रीका में कोई स्वतंत्र जलवायु मॉडल न होने के कारण इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सटीक आकलन करना मुश्किल हो जाता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में दक्षिणी अफ्रीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी जानलेवा बाढ़ की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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