सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से दूर, चांदी के वायदा भाव में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी

नई दिल्ली । दुनिया में चल रहे राजनीतिक और आर्थिक तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता के बीच लोग सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि चांदी ने पहली बार इतिहास में 3 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया।
चांदी की कीमतों में मंगलवार को रिकॉर्ड तोड़ उछाल जारी रहा और यह 3.2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई, जबकि सोने के वायदा भाव में भी तेजी आई और यह 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, मार्च डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव में 9,674 रुपये या 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
सोमवार को भारत में चांदी 3,10,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई, जबकि सोना भी नए ऊंचे स्तरों पर कारोबार करता दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 1,47,757 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,10,151 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। यानी अब आम आदमी के लिए सोना-चांदी खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है।
सरार्फा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1,46,250 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट सोना 1,34,060 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,09,690 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। वहीं चांदी की कीमत भी 3,05,100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कॉमेक्स पर आज सोना $4,669.40 प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी का भाव $93.400 प्रति औंस रहा। इससे पहले सोमवार को सोना $4,672.50 प्रति औंस और चांदी $94.065 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई थी।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस महंगाई की बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों, यूरोप से जुड़े व्यापार विवाद, चांदी की कम आपूर्ति और मजबूत मांग ने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है। ऐसे में आम लोगों के लिए गहने खरीदना या बचत के लिए सोना-चांदी लेना अब और भारी पड़ने लगा है।
जियोजित इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के कोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी बताते हैं, वैश्विक और घरेलू कारणों की वजहों से भारत में चांदी कीमतें 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं। इस वृद्धि के पीछे एक मुख्य कारण वैश्विक सप्लाई में लगातार कमी है। वे कहते हैं, दुनिया भर में चांदी का उत्पादन बढ़ती मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि खदानों का आउटपुट कम है और रीसाइक्लिंग वॉल्यूम भी कम है, जिसकी वजह से स्ट्रक्चलर में कमी हो रही है, ऐसी संभावना है कि यह परेशानी 2026 तक बनी रहेगी। हरीश बताते हैं चांदी की औद्योगिकी मांग काफी बढ़ गई है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस टेक्नोलॉजी में चांदी की आवश्यक इनपुट है। यह ऐसे सेक्टर हैं, जो ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन के हिस्से के तौर पर तेजी से बढ़ रहे हैं।
हरीश कहते हैं कि मैक्रोइकोनॉमिक हालात ने भी कीमतों को बढ़ाया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच निवेशक चांदी को एक सुरक्षित निवश एसेट के तौर पर देख रहे हैं, जिससे सिल्वर ईटीएफ में रिटेल और इंस्टीट्यूशनल दोनों तरह का पैसा आ रहा है।



