मनोरंजन

धर्मेंद्र के निधन पर पहली बार बोलीं हेमा मालिनी:कहा- उन्हें आंखों के सामने टूटते देखना मुश्किल था

दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 24 नवंबर को निधन हो गया है। अब हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के निधन के बाद पहली बार इस सदमे से उबरने पर बात की है। उनका कहना है कि ये एक ऐसा सदमा है, जिसे संभाल पाना नामुमकिन था। उन्होंने ये भी बताया कि हॉस्पिटल में ईशा, अहाना, सनी बॉबी सब साथ थे। सबको उम्मीद थी कि इस बार भी हर बार की तरह पूरी तरह ठीक होकर घर लौट आएंगे।
हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के निधन पर बात करते हुए कहा है, यह एक ऐसा सदमा था जिसे संभाल पाना नामुमकिन था। हालात बहुत बुरे थे, क्योंकि एक महीने तक जब उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, हम लगातार संघर्ष कर रहे थे। अस्पताल में जो कुछ भी हो रहा था, उससे हम जूझने की लगातार कोशिश कर रहे थे। हम सभी वहां थे, ईशा, अहाना, सनी, बॉबी, सब साथ में। पहले भी कई बार ऐसा हुआ था कि वह अस्पताल गए और ठीक होकर घर लौट आए। हमें लगा था कि इस बार भी वह लौट आएंगे।
आगे एक्ट्रेस ने कहा, ह्यवह हमसे बहुत प्यार से बात कर रहे थे। मेरे बर्थडे (16 अक्टूबर) पर उन्होंने मुझे शुभकामनाएं भी दी थीं। 8 दिसंबर को उनका जन्मदिन आने वाला था, जब वह 90 साल के होने वाले थे, और हम उसे अच्छे से मनाने की तैयारी कर रहे थे। तैयारियां चल रही थीं और फिर अचानक वह हमारे बीच नहीं रहे। उन्हें अपनी आंखों के सामने इस तरह टूटते देखना बहुत मुश्किल था। किसी को भी ऐसे हालात से नहीं गुजरना चाहिए।
हेमा मालिनी ने आॅनलाइन परिवार के बारे में फैलाई जा रहीं अफवाहों पर भी बात की है। उन्होंने कहा, ह्यमैं बहुत सारा ऐसा कंटेंट देख रही हूं, जिसमें मेरे रोने के वीडियो हैं और मेरी आंखें सूजी हुई और लाल दिख रही हैं। मैं लोगों से अनुरोध करती हूं कि वे इन सब बातों में न आएं। ऐसी चीजें देखकर मेरे फैंस और दोस्त मुझे सहानुभूति भरे मैसेज भेज रहे हैं और मजबूत रहने को कह रहे हैं। लेकिन मैं बहुत मजबूत इंसान हूं। मैं अपनी भावनाएं अपने तक ही रखती हूं।
आगे एक्ट्रेस ने कहा, जब 20 साल पहले मेरी मां का निधन हुआ था, तब मुझे लगा था कि शायद मैं उनके बिना नहीं जी पाऊंगी, लेकिन मैं जी पाई। यही जिंदगी हमें सिखाती है। वक्त किसी के लिए नहीं रुकता। जब भी मेरी बेटियां रोती हैं या परेशान होती हैं, मैं उन्हें यही बात समझाती हूं। हम धरमजी को हर पल याद करते हैं। आज सुबह थेपला बनाया था, जिसे वह चटनी के साथ बड़े चाव से खाते थे। उन्हें हमारे घर की इडली-सांभर और कॉफी भी बहुत पसंद थी। इसलिए जब-जब ये चीजें घर में बनती हैं, हम उन्हें बहुत याद करते हैं। हमारे लिए यह जरूरी है कि हम उन्हें अपने दिलों और यादों में जिंदा रखें। हमारे पास साथ के इतने सारे वीडियो हैं, जिन्हें देखकर रोना आ ही जाता है।
हेमा मालिनी ने मीडिया की मौजूदगी देख सनी देओल के भड़कने पर भी रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा, सनी बहुत परेशान और गुस्से में हो जाता था। हम सभी एक भावनात्मक दौर से गुजर रहे थे और मीडिया हमारी गाड़ियों के पीछे-पीछे भाग रही थी, बहुत ज्यादा परेशान किया गया।
हेमा मालिनी, सनी देओल द्वारा रखी गई प्रेयर मीट में नहीं पहुंची थीं, जिसके बाद उन्होंने अलग प्रेयर मीट रखी। इसके बाद से ही कई तरह के पारिवारिक मतभेद की अटकलें थीं। हेमा ने इन पर सफाई देते हुए कहा है, ‘यह हमारे घर का निजी मामला है। हमने आपस में बात कर ली थी। मैंने अपने घर पर एक प्रार्थना सभा रखी क्योंकि मेरे साथ रहनेवाले लोगों का समूह अलग है। इसके बाद मैंने दिल्ली में एक प्रार्थना सभा रखी, क्योंकि मैं राजनीति में हूं और उस क्षेत्र से जुड़े मेरे दोस्तों के लिए वहां प्रार्थना सभा करना जरूरी था। मथुरा मेरा संसदीय क्षेत्र है और वहां के लोग उनसे बेहद प्यार करते हैं, इसलिए मैंने वहां भी एक प्रार्थना सभा रखी। मैंने जो किया, उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं।’हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के साथ उनके लोनावाला फार्महाउस में बिताए यादगार पलों को भी याद किया। उन्होंने कहा, ह्यलोनावला में उनका फार्म बेहद खूबसूरत है, बिल्कुल मिनी पंजाब जैसा लगता है। वहां गाय हैं और वहीं से हमें घी मिलता है। अभी दो महीने पहले ही वह हमारे लिए घी की तीन बोतलें लाए थे और बोले थे, ह्यये ईशा के लिए है, ये अहाना के लिए है और ये तुम्हारे लिए।ह्ण वह एक बेहद प्यार करने वाले और शानदार इंसान थे। जब मैं आसपास नहीं होती थी, तो वह लोनावला में समय बिताते थे। जब मैं काम के सिलसिले में मथुरा या दिल्ली जाती थी, तो हम अपने शेड्यूल आपस में एडजस्ट कर लेते थे और जब मैं लौटती थी, तो वह भी वापस आकर मुंबई में मेरे घर आकर मेरे साथ समय बिताते थे।आगे हेमा मालिनी ने कहा, इसी तरह हम अपने नाती-पोतों के साथ खुशी-खुशी जिंदगी जी रहे थे। कई बार वह अहाना के घर भी रुक जाते थे। साथ मिलकर हमने इतने सारे खूबसूरत पल साझा किए हैं। वह हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं और अब अचानक, पिछले एक महीने से, वह हमारे बीच नहीं हैं। इसे स्वीकार करना बहुत मुश्किल है। जब भी मुझे कोई फैसला लेना होता था, मैं उनसे पूछती थी।

Related Articles

Back to top button