WordPress

Briefly unavailable for scheduled maintenance.
Check back in a some hours.
Briefly unavailable for scheduled maintenance

WordPress

Briefly unavailable for scheduled maintenance.
Check back in a some hours.
किडनी फेल होने से 20 दिन में नौ बच्चों की मौत, दो कफ सिरप बैन; जिम्मेदारों को ‘खुराक’ कब? – Dixit Times
अन्यताजा खबर

किडनी फेल होने से 20 दिन में नौ बच्चों की मौत, दो कफ सिरप बैन; जिम्मेदारों को ‘खुराक’ कब?

छिंदवाड़ा । सर्दी खांसी के चलते दूषित कप सिरप पीने से छिंदवाड़ा जिले में किडनी फेल होने से पिछले 20 दिनों में नौ बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बच्चों ने नागपुर के निजी अस्पतालों में दम तोड़ा। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने कहा है कि आरंभिक जांच रिपोर्ट में दूषित कप सीरप से बच्चों की किडनियां फेल होने से मौतें हुई हैं। संबंधित कप सिरप को जिले में प्रतिबंधित कर दिया गया है। मामले में आगे जांच जारी है। हालांकि, सवाल यह है कि जिले में कफ सिरप पर पाबंदी लगा दी गई है, लेकिन इस दूषित दवा को बेचने वाले और बनाने वालों को कौन सजा देगा? उन्हें सरकारी कार्रवाई की खुराक कब मिलेगी?
छिंदवाड़ा के सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाडे ने बताया कि पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच परासिया क्षेत्र में 6 मासूमों की मौत हुई है। कई बच्चे अभी भी छिंदवाड़ा और नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। 27 सितंबर को बच्चों के सैंपल पुणे लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आ सकेगी।
छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नांदुलकर ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें से कई की किडनी बायोप्सी जांच कराई गई। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कफ सिरप में मिला डायएथिलीन ग्लायकॉल दूषित पाया गया है। यही सिरप इन बच्चों को दिया गया था, जिससे उनकी किडनी फेल हुई।
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौतों के मामले में नागपुर लैब से आई किडनी बायोप्सी रिपोर्ट में टॉक्सिन मीडिएटेड इंजरी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित रूप से डाय एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) से सिरप में कंटेमिनेशन हुआ हो सकता है, जिससे बच्चों की किडनी पर घातक असर पड़ा।
छिंदवाड़ा और भोपाल में नेक्सट्रो-डीएस और कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की किडनी फेल होने से मौत की इसे ही वजह माना जा रहा है। ये कफ सिरप तमिलनाडु की किसी फार्मा कंपनी से बनकर आए थे। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच रिपोर्ट पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोनों कफ सिरप के उपयोग, बिक्री और वितरण पर रोक जारी रहेगी। उन्होंने डॉक्टर्स को सलाह दी है कि वे इन सिरप को मरीजों को न लिखें।
परासिया से कांग्रेस विधायक सोहन वाल्मीकि का कहना है कि अब तक कुल नौ मौतें हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने शुरूआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
छिंदवाड़ा में छह बच्चों की किडनी फेल होने से हुई मौतों के बाद भोपाल में भी स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इन मौतों की संभावित वजह कफ सिरप के सेवन को माना जा रहा है, जिसके बाद भोपाल में ठी७३१ङ्म-ऊर और उङ्म’१्रिा कफ सिरप की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच रिपोर्ट पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोनों कफ सिरप के उपयोग, बिक्री और वितरण पर रोक जारी रहेगी। उन्होंने डॉक्टर्स को सलाह दी है कि वे इन सिरप को प्रिस्क्राइब न करें, और आमजन को भी इनका उपयोग करने से बचने की चेतावनी दी है। हालांकि, उन्होंने बताया कि ये कफ सिरप भोपाल के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से उपलब्ध नहीं हैं।

Related Articles

Back to top button