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अमित शाह ने मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा पर कांग्रेस-आरजेडी की कड़ी निंदा की; लोकतंत्र का अपमान बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में कांग्रेस और राजद द्वारा मंच से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ उपयोग की गई अभद्र भाषा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस घटना को देश के लोकतंत्र पर एक धब्बा बताया और कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस निम्न स्तर पर पहुंच गई है।

अमित शाह ने गुरुवार को बिहार में कांग्रेस और राजद के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ गालियों के उपयोग की आलोचना करते हुए यह कहा। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राजनीति अपने निम्न स्तर पर पहुंच गई है और उन्हें बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है कि एक गरीब मां का बेटा प्रधानमंत्री के पद पर बैठा हुआ है।

गृह मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस मामले में तीखे शब्दों का उपयोग करते हुए कहा, “बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी स्वर्गीय माताजी के लिए जिस प्रकार गालियों से भरी अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारे लोकतंत्र को भी कलंकित करने वाला है।”

उन्होंने आगे कहा, “राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की राजनीति अपने निम्न स्तर पर आ पहुंची है। उन्हें यह बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है कि कैसे एक गरीब मां का बेटा पिछले 11 वर्षों से प्रधानमंत्री पद पर बैठा हुआ है और अपने नेतृत्व में देश को निरंतर आगे ले जा रहा है।”

अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देश की राजनीतिक संस्कृति में जहर घोलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए से लेकर आज तक, गांधी परिवार ने मोदी जी के खिलाफ नफरत फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

शाह ने कहा, “अब तो उन्होंने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। यह हर मां का, हर बेटे का अपमान है, जिसके लिए 140 करोड़ देशवासी उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।”

अमित शाह की यह निंदा कांग्रेस के सदस्यों के लिए एक चेतावनी है कि राजनीति में गरिमा और नैतिकता बनी रहनी चाहिए। उनकी बातें इस बात का प्रमाण हैं कि कैसे व्यक्तिगत हमलों के स्थान पर, विवेचना और संवाद पर जोर देना चाहिए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह एक महत्वपूर्ण घटना है, जो दर्शाती है कि कैसे अभद्र भाषा का उपयोग राजनीतिक विमर्श को विकृत कर सकता है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने के लिए विकास की बातों पर जोर देना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों पर।

कांग्रेस और राजद की आलोचना करते हुए अमित शाह ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने सदस्यों को ऐसी अभद्र भाषा के उपयोग से रोकना चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए कि ऐसे शब्दों का उपयोग न केवल उन्हें अपमानित करता है, बल्कि उस समुदाय को भी, जिसे वे पेश कर रहे हैं।

अंत में, अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर व्यक्ति को सम्मान की जरुरत होती है। राजनीतिक बहसों में गरिमा और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। उनके शब्दों में जो भावना थी, वह यह दिखाती है कि राजनीति में नैतिकता को बनाए रखने की जरुरत है ताकि देश की राजनीतिक संस्कृति बेहतर हो सके।

इस प्रकार की घटनाएं न केवल राजनीतिक दलों के लिए, बल्कि समग्र लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। जब भी कोई नेता या राजनीतिक पार्टी अभद्र भाषा का सहारा लेती है, तो यह न केवल उस व्यक्ति की विचारधारा को दर्शाती है, बल्कि समग्र राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित करती है।

इसलिए सभी राजनीतिक दलों को यह समझने की जरूरत है कि व्यक्तिगत हमलों के बजाय, विचारों और नीतियों पर आधारित चुनावी विमर्श अधिक महत्वपूर्ण है। इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया स्वस्थ होती है, बल्कि संपूर्ण राजनीतिक वातावरण में भी सुधार आता है।

इस तरह की घटनाओं के खिलाफ ज़रूरी है कि सभी राजनीतिक नेतृत्व एकजुट होकर उसके खिलाफ आवाज उठाएं और सुनिश्चित करें कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कोई भी दरार न पहुंचे। देश के प्रत्येक नागरिक के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने नेताओं से ऐसी भाषा और व्यवहार की अपेक्षा करें जो समाज में एकजुटता और भलाई को बढ़ावा दे सके।

इसलिए, अमित शाह के बयान ने फिर एक बार यह सवाल उठाया है कि क्या भारतीय राजनीति में नैतिकता और गरिमा का स्तर गिरता जा रहा है या क्या इसे वापस स्थापित करने का समय आ गया है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि राजनीतिक क्षेत्र में लोग अपने विचारों को साझा करें, लेकिन यह करते समय वे गरिमा और समर्पण का पालन करें।

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