राष्ट्रीय

रघुरम राजन की चेतावनी: व्यापार अब एक हथियार है, भारत को सीखना चाहिए – 50% टैरिफ मुद्दा

रघुरम राजन की अमेरिकी टैरिफ पर विचार: भारत के लिए एक नई दिशा

भारत के पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर, रघुरम राजन, ने हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा घोषित 50% टैरिफ को भारत के लिए ‘वेक-अप कॉल’ के रूप में देखा। उनका मानना है कि यह भारत के लिए एक संकेत है कि उसे अपने व्यापारिक भागीदारों पर निर्भरता कम करना चाहिए।

व्यापार और नीति का संदेह

राजन ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापार, वित्त और निवेश को इसलिए हथियार बनाया जा रहा है जिससे देशों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए मजबूर किया जा सके। उन्होंने सलाह दी कि भारत को अपने रूसी तेल आयात पर नीति का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए और यह समझने की आवश्यकता है कि इसके फायदे और नुकसान कौन उठाता है। उनका कहना है कि इस स्थिति में भारतीय रिफाइनर्स तो मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन छोटे निर्यातक उन टैरिफ के कारण वित्तीय असमानता का सामना कर रहे हैं।

विविधता का महत्व

राजन ने यह भी बताया कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर होना एक खतरनाक स्थिति हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने विदेशी व्यापार को विविधीकृत करने की आवश्यकता है, जिससे वह किसी भी वैश्विक संकट के दौरान अधिक स्थिर रह सके। उन्हें लगता है कि भारत को चीन, जापान और अमेरिका जैसे देशों के साथ काम करना चाहिए, लेकिन यह अति निर्भरता से बचते हुए।

छोटे निर्यातकों का संघर्ष

राजन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के टैरिफ का प्रभाव खासकर छोटे निर्यातकों पर पड़ेगा, जैसे कि झींगा किसान और कपड़ा निर्माता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च टैरिफ का होना अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि इससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी।

ट्रम्प के टैरिफ के कारण

राजन ने ट्रम्प के टैरिफ को तीन प्रमुख कारणों से प्रेरित बताया। पहला, ट्रम्प का मानना था कि व्यापारियों को अपने नुकसानों का सामना करना चाहिए और इससे यह दिखाता है कि अमेरिका हमेशा विजयी रहे। दूसरा, टैरिफ से उत्पन्न राजस्व का उपयोग अमेरिका के लिए स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। और तीसरा, विदेशी नीति के एक हथियार के रूप में इन टैरिफ का प्रयोग किया जा रहा है, ताकि अन्य देशों को एक सबक सिखाया जा सके।

नवारो की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया

रघुरम राजन ने व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिन्हें भारत के रूस के साथ संबंधों पर प्रश्न उठाने के लिए जाना जाता है। राजन ने स्पष्ट किया कि नवारो का विश्लेषण वर्तमान स्थिति को ठीक से नहीं दर्शाता है।

सारांश

युवा अर्थशास्त्री के रूप में रघुरम राजन ने भारत को वैश्विक आर्थिक मतभेदों को समझने और उससे निपटने का एक स्मार्ट तरीका सुझाया है। उनका सुझाव है कि आर्थिक विविधता और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना भारत के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण तरीका होगा।

भविष्य की दिशा

भारत को अपने व्यवसाय को केवल एक देश के साथ नहीं जोड़ना चाहिए, बल्कि विविधता लाने पर ध्यान देना चाहिए। आने वाले समय में, यदि भारत इन सुधारों को नहीं लागू करता है, तो वह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी स्थिति खो सकता है।

रघुरम राजन के विचार न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उनका दृष्टिकोण उन देशों के लिए एक संकेत है जो आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता की तलाश कर रहे हैं।

इस प्रकार, रघुरम राजन के विचार वैश्विक व्यापार के जटिलताओं को समझने में सहायक हैं और भारत को अपने आर्थिक दृष्टिकोण को पुनर्निर्धारित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके माध्यम से, भारत एक अधिक संतुलित और विविधीकृत वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क स्थापित कर सकता है।

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button