आगरा

युवक पत्नी के साथ बहस के बाद नहर में कूदकर आत्महत्या करता है।

कासगंज में एक दुखद घटना हुई, जिसमें एक युवा व्यक्ति की जान चली गई। ऐसा बताया गया है कि घटनाओं की शुरुआत तब हुई जब प्रमोद कुमार नामक एक 25 वर्षीय युवक अपनी पत्नी के साथ बाइक पर जा रहा था। दोनों दवा लेने के लिए ढोलाई क्षेत्र के समीप स्थित सतपुरा माफी गांव की ओर जा रहे थे। इस दौरान, किसी बात पर बहस हो गई, जो देखते-देखते गर्मागर्मी में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रमोद अपनी पत्नी से बहस करते हुए इतना नाराज हो गया कि उसने बाइक को रास्ते पर ही रोक दिया और बिना सोचे-समझे हजारा नहर में कूद गया। यह घटना मंगलवार को हुई थी, और इसके बाद से परिवार के सदस्य और पुलिस उसकी तलाश में जुट गए। तीन दिन तक गोताखोरों ने नहर में उसकी खोज जारी रखी, लेकिन उसकी कोई सूचना नहीं मिली।

बुधवार को भी नहर की तलाशी ली गई, लेकिन प्रमोद का कोई भी सुराग नहीं मिला। इसके बाद, गुरुवार को एक बार फिर से नहर की खोज की गई। इस बार, खोज के दौरान गोताखोरों को प्रमोद का शव पानी में दिखाई दिया।

पुलिस ने तुरंत गोताखोरों की मदद से उसके शव को बाहर निकाला और परिवार के सदस्यों को सूचित किया। जब परिवार के लोग मौके पर पहुंचे तो उनका कहना था कि प्रमोद के शव को देखकर फूट-फूट कर रो पड़े। यह एक अत्यंत दर्दनाक दृश्य था, जिसको देख कर वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की आंखों में आंसू आ गए।

कोट्वेली इन-चार्ज ने बताया कि प्रमोद की पत्नी से बाइक पर यात्रा करते समय झगड़ा हुआ था और इसके बाद प्रमोद ने नहर में छलांग लगा दी। शव को पोस्ट-मॉर्टम के लिए भेज दिया गया और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह कई सवाल भी खड़े करती है। एक ऐसा युवा, जो अपने परिवार का सहारा बनना चाहता था, अपनी निजी समस्याओं के कारण इतनी नाजुक स्थिति में पहुंच गया। यह इस बात का संकेत है कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की कितनी आवश्यकता है।

अक्सर हम देखते हैं कि छोटे-छोटे विवादों के चलते लोग जिंदा रहने के बजाय ऐसा कदम उठाने में हिचक नहीं करते। यह सही है कि जीवन में तनाव आते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह से हल करना आत्महत्या से कहीं अधिक सही है। हमें अपनी भावनाओं को बयां करने के लिए स्वस्थ तरीके खोजने होंगे, ताकि किसी भी व्यक्ति को इस तरह के दुखद निर्णय लेने के लिए मजबूर न होना पड़े।

प्रमोद की कहानी उन सैकड़ों युवा लोगों की कहानी है जो अपने जीवन के कठिन दौर में हैं लेकिन मदद मांगने में संकोच करते हैं। अगर हर एक व्यक्ति अपने दिल की बात को खुलकर कह सके, तो शायद ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। इसलिए, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम एक-दूसरे का ध्यान रखें और एक स्वस्थ संवाद स्थापित करें।

उनके परिवार के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। ऐसे समय में, जब परिवार को प्रमोद जैसे व्यक्ति की जरूरत थी, उन्होंने उसे खो दिया। समाज को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हम अपनी भावनाओं से जूझ रहे लोगों की मदद कर सकें और उन्हें इस तरह के तनाव से बाहर निकाल सकें।

हर एक जीवन की कीमत होती है, और एक युवा व्यक्ति की इस तरह की मृत्यु केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में गहरी समस्याओं की ओर इशारा करती है। इसलिए, हमें चाहिए कि हम इस पर विचार करें और आगे बढ़ें, ताकि हमारी अगली पीढ़ी को ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का सामना न करना पड़े।

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