अंतरराष्ट्रीय

अमेरिकी टैरिफ के तहत भारत; भारत ने पुतिन का साथ दिया—ट्रम्प के खास सांसद ने भी चीन और ब्राजील पर हमला किया।

लिंडसे ग्राहम का भारत पर हमला

वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने हाल ही में भारत को निशाना बनाते हुए कहा कि देश पुतिन को समर्थन देने की बड़ी कीमत चुका रहा है। उनके अनुसार, भारत, चीन, ब्राजील और कुछ अन्य देश सस्ते रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को मजबूती दे रहे हैं।

लिंडसे ग्राहम का बयान

वाशिंगटन से एक बयान में, ग्राहम ने रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत और उसके जैसे देशों के व्यवहार की निंदा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे देश जो पुतिन से सस्ते तेल खरीदते हैं, वे न केवल आर्थिक लाभ कमा रहे हैं, बल्कि निर्दोष नागरिकों की हत्या के लिए भी जिम्मेदार हैं। उनकी बातें स्पष्ट करती हैं कि वर्तमान वैश्विक राजनीतिज्ञों के बीच दुरुपयोग और स्वार्थ के किस हद तक बढ़ने की चिंताएँ हैं।

गुरुवार को, ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा, “जब आप मासूम बच्चों को मारते हैं, तो आपको कैसा लगता है?” यह सवाल ग्राहम ने उन देशों के लिए उठाया जो अपने क्षेत्रीय स्वार्थों के कारण मानवता का लाभ उठाते हैं।

भारत पर सख्त टिप्पणियाँ

ग्राहम ने भारत को पहले भी अधिसूचनाएँ दी हैं। उन्होंने भारत, चीन और ब्राजील को यह चेतावनी दी थी कि अगर वे रूस से तेल खरीदते रहे, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप है कि ये देश रूस के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ खड़े हो रहे हैं, और इसलिए उन्हें इसके पेचीदा परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

गृह के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में, ग्राहम ने यह भी दावा किया कि अमेरिका इन देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है। उनका मानना है कि जरूरत पड़ने पर, ऑल-आउट टैरिफ या दूसरे आर्थिक उपाय भी लागू किए जा सकते हैं।

लिंडसे ग्राहम की पृष्ठभूमि

लिंडसे ग्राहम एक अनुभवी राजनेता हैं, जो दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर के रूप में कार्यरत हैं। वे अमेरिकी सेनाओं के एक पूर्व अधिकारी भी रहे हैं। 2003 से सीनेट में कार्यरत, ग्राहम को उनकी मजबूत विदेश नीति और रूस-चीन के खिलाफ सख्त स्थिति के लिए जाना जाता है।

ग्राहम के राजनीतिक करियर में उनके एंटी-रूस रुख का एक प्रमुख स्थान है। उन्होंने हमेशा रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों का समर्थन किया है, और उनके विचारों का प्रभाव उनकी पार्टी की नीति निर्माण पर स्पष्टतः दिखाई देता है।

रूस-चीन मुद्दा

ग्राहम द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने चीन और ब्राजील जैसे देशों की भूमिका को भी आलोचना की है और यह साफ़ किया है कि इन देशों की नीतियों का अमेरिका के सामरिक स्वार्थों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

चीन के संबंध में, ग्राहम ने कहा कि यदि चीन ने भारत और ब्राजील की तरह रूस का समर्थन किया, तो इसका दुष्प्रभाव उन पर भी पड़ेगा। उनका मानना है कि वैश्विक राजनीति का यह जटिल पैंतरा अब अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नई दिशाएँ गढ़ी हैं।

समापन

लिंडसे ग्राहम की टिप्पणियाँ न केवल भारत, बल्कि अन्य देशों के लिए भी चेतावनी के रूप में देखी जा सकती हैं। यह स्पष्ट है कि वे किसी भी प्रकार की विदेशी नीति को नजरअंदाज करने के खिलाफ हैं और यह मानते हैं कि सभी देशों को अपनी खरीदारी का ध्यान रखते हुए असमानता और हिंसा को नहीं बढ़ाने का निर्णय लेना चाहिए।

उनकी बातें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि वर्तमान विश्व में, आर्थिक नीतियों का मानवता पर गहरा प्रभाव होता है। लिंडसे ग्राहम जैसे नेता अपनी आवाज़ उठाकर उन मुद्दों पर रोशनी डालते हैं जो वैश्विक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे समय में जब कूटनीति और समझौते आवश्यक हैं, उनकी चेतावनियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि किसी भी देश का निर्णय न केवल उसके अपने बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार, लिंडसे ग्राहम का बयान एक सतर्क संदेश के रूप में सफेद पेंट में प्रस्तुत होता है, जो सभी देशों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की प्रेरणा देता है।

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