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भारत के तेज गेंदबाज नया विश्व रिकॉर्ड बना सकते हैं, शोएब अख्तर को पछाड़ते हुए।

विश्व क्रिकेट में एक नई उम्मीद: मयंक यादव

विश्व क्रिकेट में भले ही शोएब अख्तर के नाम सबसे तेज गेंद डालने का रिकॉर्ड हो, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाज मयंक यादव इस रिकॉर्ड को तोड़ने की क्षमता रखते हैं। शोएब अख्तर ने 2003 के विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 161.3 किमी प्रति घंटे की गति से गेंद फेंकी थी, जो आज तक कोई अन्य गेंदबाज नहीं तोड़ पाया है।

मयंक यादव की पृष्ठभूमि

मयंक यादव का जन्म दिल्ली में हुआ, लेकिन उनके परिवार का संबंध बिहार से है। उनका परिवार सुपुल जिले के मरुना ब्लॉक के रथो गांव से आता है। मयंक के पिता, प्रभु यादव, पहले एक सायरन बनाने वाली कंपनी में काम करते थे, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ। इसके बाद, मयंक के पिता को चाय की दुकान और अंडे बेचने का काम करना पड़ा।

मयंक की क्रिकेट यात्रा

मयंक यादव ने बचपन से ही जेट विमानों और रॉकेटों की गति से प्रेरणा ली। आईपीएल 2024 में लखनऊ सुपरजायंट्स के साथ अपनी तेज गति का प्रदर्शन कर, मयंक ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने आरसीबी के खिलाफ 156.7 किमी प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी की, जिससे वह रातों-रात स्टार बन गए।

रिकॉर्ड तोड़ने की क्षमता

मयंक यादव ने अब तक भारत के लिए 3 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और इस प्रारूप में उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। उन्होंने 20.75 की औसत से 4 विकेट लिए हैं। उनकी गेंदबाजी क्षमता ने उन्हें भारतीय टीम में स्थायी जगह दिलाई है, जिससे साफ है कि उनकी गति में निरंतर वृद्धि हो रही है।

आईपीएल में प्रदर्शन

आईपीएल 2024 में, मयंक यादव ने लखनऊ सुपर दिग्गजों के लिए 4 मैचों में 7 विकेट लिए। आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में लखनऊ सुपर जाइन्ट्स ने उन्हें 11 करोड़ रुपये में बनाए रखा, जो उनकी क्षमता को दर्शाता है। चोट के कारण वह पहले आईपीएल 2023 से बाहर हो गए थे, लेकिन 2024 में चारों ओर अपनी गति के साथ धूम मचाई।

बल्लेबाजों के लिए बुरा सपना

यदि मयंक अपनी गति में और सुधार करते हैं, तो शोएब अख्तर का रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए संभव है। IPL 2024 में उनकी यॉर्कर गेंदें बल्लेबाजों के लिए मुश्किल साबित हुईं। क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें भी उन पर टिकी हैं कि मयंक यादव समय के साथ आगे बढ़ेंगे और अपने आलोचकों को गलत साबित करेंगे।

भविष्य की संभावनाएँ

मयंक यादव की गति के साथ-साथ वे निरंतरता भी दिखा रहे हैं, जिससे उन्हें भारतीय क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण स्थान मिलने की संभावना है। मयंक केवल 23 वर्ष के हैं और उनके पास अभी बहुत कुछ हासिल करने का अवसर है।

निष्कर्ष

सम्भवतः अगले कुछ वर्षों में मयंक यादव क्रिकेट की दुनिया में शोएब अख्तर के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं। उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और गति के साथ-साथ उनके पिता की संघर्षशीलता, मयंक को क्रिकेट की दुनिया में उच्चतम शिखरों तक पहुँचाने के लिए प्रेरणा देती है।

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