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ट्रम्प के टैरिफ से इस क्षेत्र के 25 लाख लोगों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

सूरत का हीरा उद्योग और अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

सूरत, गुजरात, विश्व में हीरे को काटने और पॉलिश करने का एक प्रमुख केंद्र है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने इस उद्योग में काम करने वाले व्यापारियों और श्रमिकों के लिए चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इस परिवर्तन से प्रभावित होने वाले श्रमिकों की संख्या 25 लाख से ज्यादा हो सकती है, जो इस उद्योग पर निर्भर हैं।

अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ का सबसे अधिक प्रभाव सूरत के हीरा व्यापारियों पर हो रहा है, जो अपनी अधिकतर बिक्री अमेरिका को करते हैं। इस क्षेत्र में व्यापारियों और श्रमिकों के लिए आर्थिक अस्थिरता की संभावना बेहद बढ़ गई है। यदि यह टैरिफ कम नहीं होते हैं, तो अनेक व्यापारी उद्योग से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाएंगे और लाखों श्रमिकों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।

कुछ व्यापारिक संगठनों जैसे सूरत डायमंड एसोसिएशन का मानना है कि टैरिफ के कारण मंदी आएगी, लेकिन यह एक अस्थायी स्थिति होगी। इनके अनुसार, अमेरिका में हीरे की मांग भी बनी रहेगी, इसलिए दोनों पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि समस्या का समाधान हो।

सूरत की फैक्ट्रियों का हाल

सूरत के बाजारों में सुबह और शाम सर्वाधिक भीड़ होती है, क्योंकि उस समय हीरे के कारीगर अपने काम पर जाते हैं या लौटते हैं। शहर के विभिन्न छोटे और बड़े कारखानों में कई श्रमिक काम कर रहे हैं, जिनकी संख्या 20 से 500 तक होती है। हालाँकि, अब कारखानों में उत्पादकता में कमी आई है, जिससे कई श्रमिकों की नौकरियां खतरे में हैं।

एक व्यापारी ने बताया कि उनके कारखाने में पिछले साल अगस्त में औसतन 2000 हीरे प्रति माह की प्रक्रिया हो रही थी, लेकिन अब यह संख्या गिरकर 300 हीरा रह गई है। स्थिति बढ़ती जा रही है क्योंकि कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या में भी कमी आ रही है।

यह सब सुनकर श्रमिकों में अनिश्चितता और चिंता की लहर दौड़ गई है। वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव सूरत में भी महसूस हो रहा है। मजदूर सुरेश राठौर का कहना है कि उन्हें पहले की तरह ईद और अन्य त्यौहारों पर छुट्टियां नहीं मिल रही हैं, और जब मिले, तो बिना वेतन के।

वेतन में कटौती और नौकरियों का संकट

सूरत के हीरा उद्योग में श्रमिकों के वेतन में कटौती की बातें सामने आई हैं। कई श्रमिक अपने अपने उद्योगों में कार्यरत हैं, लेकिन अब वेतन की कमी और नौकरी के स्थायित्व को लेकर चिंतित हैं। उरात डायमंड पॉलिशियर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भवेश टैंक के अनुसार, कई ज्वैलर्स ने लगातार शिकायत की है कि उनके वेतन में कमी आ गई है।

दूसरी ओर, हीरा निर्यातकों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। निर्यातक अपनी गतिविधियाँ सीमित कर रहे हैं और कुछ ने अन्य क्षेत्रों में अवसर ढूंढने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत सहायता करनी चाहिए ताकि उद्योग को पुनर्जीवित किया जा सके।

सूरत के हीरा उद्योग का भविष्य

इस उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति आगे बद से बदतर हो सकती है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के गुजरात अध्यक्ष ने सुझाव दिया है कि उद्योग को अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और अन्य संभावित बाजारों को तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वे नए बाजारों की खोज करते हैं, तो इससे उद्योग को मजबूती मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को भारतीय हीरों की आवश्यकता है, और यह सुनिश्चित करना दोनों पक्षों के लिए आवश्यक है कि एक स्थायी समाधान निकाला जाए। सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश खंट का कहना है कि भारतीय हीरे के बिना, अमेरिका का व्यापार प्रभावित होगा।

संभावनाएँ और चुनौतियाँ

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि सूरत के हीरा उद्योग में चल रही दिक्कतें केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हैं। ब्रजेश मंगुकिया, एक व्यापारी, ने कहा कि उन्हें अपने व्यवसाय को बचाने के लिए बेहतर मार्केटिंग रणनीतियों की आवश्यकता है।

विश्लेषक मानते हैं कि अगर टैरिफ कम नहीं होते हैं, तो आने वाले समय में हीरा उद्योग में बड़ी मंदी आ सकती है। हालांकि, अगर व्यापारी और श्रमिक एक साथ मिलकर काम करें, तो यह संभव है कि स्थिति में सुधार हो सके।

सूरत का हीरा उद्योग अपनी चमक खोता नजर आ रहा है। व्यापारियों को नई संभावनाओं की तलाश करनी होगी और श्रमिकों को धैर्य रखना होगा। व्याकुलता और चिंताओं के बीच हीरा उद्योग का भविष्य अभी भी अनिश्चित है।

इस प्रकार, सभी पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि वे सामूहिक प्रयास करें और एक स्थायी समाधान खोजें, ताकि सूरत का यह उद्योग फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

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