Sanjay Nishad claims his influence on the Nishad Party; BJP leader counters minister in Gorakhpur.

गोरखपुर में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा के पूर्व सांसद जयप्रकाश निषाद के माध्यम से BJP पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि उन्हें हमारे सहयोग की जरूरत नहीं है, तो गठबंधन तोड़ दें, लेकिन छोटे नेताओं का तिरस्कार करने की जरुरत नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा में कई आयातित नेता हैं जो अपने बड़बोलेपन के कारण पार्टी को संकट में डाल रहे हैं। ये नेता सपा, बसपा और कांग्रेस से लाए गए हैं। ऐसे नेताओं को भाजपा के हाईकमान से सावधान रहना चाहिए।
जयप्रकाश निषाद ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि मैंने निषाद पार्टी और संजय निषाद को खड़ा किया है। जब वे मुझे नहीं जानते हैं, तो अपने पार्टी के पदाधिकारियों को भी मामूली समझते होंगे।
उन्होंने बताया कि जब कसरवल कांड हुआ, तब मैं ही समाज के साथ खड़ा था। मैंने इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़कों तक उठाया। जब डॉ. संजय निषाद का कोई नहीं था, मैं उस समय राज्य मंत्री था और बाद में विधायक और राज्य सभा सदस्य बना।
डॉ. संजय निषाद ने भाजपा पर हमले करते हुए जयप्रकाश निषाद को छोटे नेता कहा। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा कि जयप्रकाश कौन हैं? जब बताया गया कि वो चौरी-चौरा क्षेत्र से हैं, तो उन्होंने कहा कि अच्छा, वो जो हाथी पर चलकर आए हैं, जो पहले बसपा में थे।
जयप्रकाश निषाद ने डॉ. संजय के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “मैं राजनीति में 2003 से सक्रिय हूं और 2007 से 2012 तक बसपा सरकार में राज्य मंत्री रहा। मेरी स्थिति तब मजबूत थी जब डॉ. संजय कुछ नहीं थे।”
उन्होंने आगे कहा, “जब संजय कहते हैं कि वो मुझे नहीं जानते, तो वे यह भूल रहे हैं कि वे मेरे आगे-पीछे मंत्री जी कहते हुए घूमते थे। अगर वे मुझे नहीं पहचानते, तो कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों को क्या जानेंगे?”
जयप्रकाश ने कसरवल कांड पर कहा, “मैंने उस कांड के दौरान सदन में अकेले आवाज उठाई। मैंने सड़कों से लेकर सदन तक अपनी लड़ाई लड़ी। ऐसे मुद्दों पर मैं कर्ता-धर्ता था।”
उन्होंने यह भी कहा कि छुटभैया नेता का मुद्दा सभी जानते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि 2008 से लेकर 2012 तक मेरी स्थिति स्पष्ट थी। मैंने 2018 में भाजपा में शामिल होकर अपनी मेहनत और संघर्ष से सिद्ध किया कि मैं असली नेता हूं।
जब सवाल उठाया गया कि क्या भाजपा की वजह से डॉ. संजय निषाद का कद बढ़ा, तो उन्होंने कहा, “डॉ. संजय का जो सम्मान है, वह भाजपा की बदौलत है। इसलिए अब उसी पार्टी को धमकी दे रहे हैं।”
जयप्रकाश ने यह भी कहा कि वह सच्चे भाजपा कार्यकर्ता हैं और यहां किसी की पहचान के लिए नहीं आते हैं। “यहां कोई मांगे नहीं, यहां कार्यकर्ता को खुद ही अवसर दिए जाते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्हें याद दिलाया गया कि डॉ. संजय के बेटे ने 2018 में लोकसभा चुनाव में हार का सामना किया था। जयप्रकाश ने कहा, “2018 में पूरा समाज उनके साथ था, लेकिन 2024 में जब उनके बेटे ने समाज के हित में कुछ नहीं किया, तो उन्होंने वोट नहीं मांगे।”
उन्होंने कसरवल कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जिस शहीद ने अपनी जान दी, उसके पिता आज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, जबकि डॉ. संजय उस मुद्दे का लाभ उठा रहे हैं।
जयप्रकाश ने कहा कि भाजपा मछुआ समाज की असली मित्र है और प्रधानमंत्री मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समाज के लिए कार्य कर रहे हैं। “डॉ. संजय जैसे लोग समाज को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब समाज ऐसा नहीं सहने वाला।”
अचानक डॉ. संजय निषाद के BJP पर हमले के कारणों की चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि यह चुनाव से पहले सभी विकल्पों को खुले रखने का एक तरीका है। छोटे दल हमेशा प्रमुख दलों के साथ रहने की कोशिश करते हैं और चुनावों से पहले अपने विकल्पों को बनाए रखना चाहते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सहयोगी दलों को भी अपनी ताकत बढ़ाने की जरूरत है। राज्यों में भाजपा की स्थिति चाहे जो हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर उन्हें मुख्यमंत्री के अनुसार चलना पड़ता है। ऐसे बयानों के माध्यम से अपने वजूद को मजबूत करना उन दलों के लिए जरूरी होता है।
इस तरह की स्थितियों में सभी दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपनी पहचान बनानी पड़ती है और ऐसे समय में अपनी सामाजिक पहचान को मजबूत करना राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक होता है।