गणेश चतुर्थी पर निधिवन जुलूस की शुरुआत और चंदोसी में शिव विवाह समारोह

निधिवन झांकी को एक विशेष आयोजन में लॉन्च किया गया, जो कि वृंदावन के गणेश चौथ मेले के दौरान हुआ। यह झांकी दर्शकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हर साल नए स्वरूप में प्रस्तुत की जाती है। इस बार, निधिवन की झांकी को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसके तहत भक्तों के लिए पूजा, अर्चना और आरती का आयोजन किया गया है।
गणेश आश्रम में आयोजित इस समारोह में, लगभग 450 गज दूर निर्मित निधिवन का उद्घाटन किया गया। यहाँ devotees के लिए झांकी के दर्शन करने का अवसर प्रदान किया गया है। गजानन परिषद में हर साल एक नई झांकी स्थापित की जाती है, जिससे भक्तों की भक्ति और उत्साह में वृद्धि होती है। पहले यह झांकी स्वचालित टैब्लो के माध्यम से दर्शाई जाती थी, लेकिन अब इसे एक नई रूपरेखा में प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव है।
इस बार झांकी भी गजानन परिसर में गणेश मंदिर के सामने स्थापित की गई है, जहाँ इसे बहुत ऊँचाई पर रखा गया है। पिछले वर्षों में केदारनाथ, बद्रीनाथ, पूर्णगिरी, वैष्णो देवी, रामेश्वरम, नीलकंथ आदि की झांकियाँ बन चुकी हैं, और बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने आते हैं। इस बार झांकी का विषय वृंदावन की विशेषताओं को उजागर करने के लिए तैयार किया गया है।
अधिकारियों ने इस विशेष झांकी का उद्घाटन किया, जिसमें भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ जयकारे लगाते हुए भाग लिया। आयोजकों में कई सम्मानित व्यक्तित्व मौजूद थे, जिन्होंने इस विशेष अवसर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिव विवाह जैसे कार्यक्रम ने इस समारोह में और भी रंग भर दिया। शिव विवाह गणेश मंदिर परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें भक्तों ने भगवान शिव की भक्ति में भजन गाए। इस समारोह में भाग लेकर भक्तों ने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
गणेश रथ यात्रा भी इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान गजानन का विशाल रथ बुधवार को गणेश चतुर्थी के दिन निकाला जाएगा। रथ यात्रा में बैंड और स्वचालित झांकी का समावेश किया जाएगा, जिससे यह यात्रा और भी आकर्षक बनेगी। पूजा का कार्य सुबह करीब पांच बजे से आरंभ होगा और शहर में गणेश चतुर्थी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
भक्तों को मंदिर में प्रवेश देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, गजानन की नई निर्मित प्रतिमा भी दर्शकों के दर्शन के लिए हॉल में रखी जाएगी। पूजा के अंत में भक्तों को मुख्य द्वार से बाहर जाने की व्यवस्था की जाएगी। रथ यात्रा के दौरान भगवान गणेश की मूर्तियों को शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया जाएगा, और फिर झांकी का संचालन किया जाएगा।
इस बार झांकी में ऊँट और घोड़े शामिल होंगे, जो यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। इसके आलावा, गुड्डा और गुड़िया, जो हाथी के साथ इस बार यात्रा का हिस्सा बने हैं, को भी सजाया जाएगा। यह यात्रा दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव बनेगी, जिसमें कई बैंड और संगीत वाद्ययंत्र शामिल होंगे।
जिला प्रभारी मंत्री इस रथ यात्रा का उद्घाटन करेंगे, और उनकी उपस्थिति प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगी। यात्रा के अंत में भगवान गणेश के प्रमुख सिंहासन की आरती की जाएगी, जिससे सभी भक्तों को एकत्रित होकर इस अवसर को मनाने का मौका मिलेगा।
इस आयोजन ने न केवल भक्तों के बीच उत्साह बढ़ाया, बल्कि यह धार्मिक सहिष्णुता और एकता का भी प्रतीक बना। इस प्रकार के आयोजन न सिर्फ श्रद्धा और भक्ति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में एक साक्षरता का संदेश भी फैलाते हैं।
गणेश चतुर्थी जैसे पर्वों के दौरान, भक्तों का समर्पण और एकता एकत्रित होती है, जिससे समाज में भाईचारा और प्रेम का संदेश फैलता है। विभिन्न झांकियाँ, कार्यक्रम और रथ यात्राएँ दर्शकों को एक नई सकारात्मकता और ऊर्जा से भर देती हैं।
आज के इस समय में, जब समाज में भौतिकता और स्वार्थ बढ़ रहा है, ऐसे धार्मिक आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि भक्ति और सहयोग ही हमें एकता की ओर ले जाते हैं। गणेश चतुर्थी का यह आयोजन भक्ति, श्रद्धा और एकता का प्रतीक है, जो हर साल भक्तों को एकत्रित करता है।
इस प्रकार, निधिवन झांकी और गणेश चतुर्थी का आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति और परंपराएँ हमें एक क्षेत्र में एकजुट करती हैं और हमें मिलकर त्योहार मनाने की प्रेरणा देती हैं।
हर वर्ष की तरह यह बार भी, भक्तजन अपनी भक्ति और श्रद्धा के साथ इस मेले में शामिल होते हैं, जिससे यह आयोजन और भी भव्य और सफल बनता है। गणेश चतुर्थी का यह उत्सव हर किसी के दिल में खुशियाँ और उमंग भर देता है, और यह प्रत्येक भक्त के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव होता है।