खेल

राजस्थान के इस पुलिस स्टेशन ने शॉटपुट क्वीन को पदक देकर भारत का मान बढ़ाया है।

कचनर चौधरी की सफलता की कहानी

राजस्थान की कचनर चौधरी ने एक बार फिर sports की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हाल ही में चेन्नई में आयोजित वरिष्ठ राष्ट्रीय अंतर राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने 15.75 मीटर की शॉटपुट डालकर स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले, उन्होंने विश्व पुलिस खेलों, राज्य चैंपियनशिप और अखिल भारतीय पुलिस खेलों जैसी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। कचनर ओलंपिक की तैयारी भी कर रही हैं और उनके लक्ष्य ऊंचे हैं।

जयपुर की प्रतिभा

जयपुर के खिलाड़ी खेल प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं। कचनर चौधरी का हालिया प्रदर्शन इस बात का पुख्ता सबूत है। चेन्नई में हुई सीनियर नेशनल इंटर स्टेट चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने 15.75 मीटर की दूरी तय करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले राज्य चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन भी शानदार था, जहां उन्होंने 14.98 मीटर की दूरी तय की थी। यह स्पष्ट है कि कचनर अपने खेल में लगातार सुधार कर रही हैं, हालाँकि उन्हें अभी तक अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तक पहुँचने में समय लग रहा है, जो उन्हें ओलंपिक दौड़ में शामिल कर सके।

अंतरराष्ट्रीय सफलता

अमेरिका में आयोजित विश्व पुलिस खेलों में, कचनर ने शॉटपुट इवेंट में 14.98 मीटर की दूरी फेंककर स्वर्ण पदक और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता। साथ ही, उन्होंने राज्य एथलेटिक चैम्पियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था, जो राष्ट्रीय रिकॉर्ड 18.41 मीटर से मात्र 3.5 मीटर कम है। कचनर चौधरी ने लगातार दो बार विश्व पुलिस खेलों में पदक जीते हैं, जिसमें 70 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।

खेल का सफर

कचनर चौधरी ने 9 साल पहले शॉटपुट खेलना शुरू किया था और तब से उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। उनके पिता, परेश चौधरी, भी एक शॉटपुट और डिस्कस थ्रोअर खिलाड़ी रहे हैं। चेन्नई की प्रतियोगिता में, उन्होंने महिला शॉटपुट इवेंट में अपनी भुजाओं का उपयोग मामले में कुशलता से किया। चौथे प्रयास में, उन्होंने अपने दूसरे प्रयास 15.41 मीटर और फिर 15.75 मीटर को कवर करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

रेलवे और पुलिस की सेवा

कचनर चौधरी को 19 साल की उम्र में रेलवे में नौकरी मिली। इसके बाद, वह राजस्थान पुलिस में शामिल हो गईं। वर्तमान में वह राजस्थान पुलिस में उप-इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने विभिन्न देशों और भारत में आयोजित पुलिस खेलों जैसी प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते हैं। अखिल भारतीय पुलिस खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता है। उनके द्वारा पदक जीतने से राजस्थान पुलिस का नाम रोशन हो रहा है और उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

आत्म-प्रेरणा

कचनर चौधरी सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्‍वल हैं। उन्होंने 12वीं में 90% अंक प्राप्त किए और BA में MA (अंग्रेजी) में पहला डिवीजन प्राप्त किया। वर्तमान में वह एलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। कचनर का कहना है कि अध्ययन और खेल को संतुलित करना बहुत मुश्किल है, लेकिन वह दोनों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

कचनर का जन्म 17 मई 1999 को चुरू जिले के सुजंगढ़ शहर में हुआ था। उनकी मां अनीता सिंह और पिता परेश चौधरी दोनों राजस्थान शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। आज कचनर के इंस्टाग्राम पर 1.76 लाख अनुयायी हैं, जबकि YouTube पर 1 लाख और फेसबुक पर 3.09 लाख अनुयायी हैं।

प्रारंभिक प्रतियोगिताएँ

कचनर चौधरी ने 19 साल की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खेल खेला था, जहां वह शॉटपुट गेम में राजस्थान की सबसे कम उम्र की एथलीट थीं। उन्होंने अपने शॉटपुट के लिए अलग-अलग स्थानों पर ट्रेनिंग की है और जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में कोच विरेंद्र प्यूनिया से लंबा प्रशिक्षण लिया है।

2024 में, कचनर ने अब तक के अंतर-राज्य राष्ट्रीय में 16.76 मीटर की दूरी स्थापित की थी, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ है। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है।

अन्य पुरस्कार

कचनर चौधरी ने 18 वर्ष की उम्र से ही कई टूर्नामेंटों में स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने विश्व विश्वविद्यालय खेलों में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं और राष्ट्रीय खेलों में भी अपनी छाप छोड़ी है। कचनर ने 2016 में आयोजित जूनियर नेशनल और यूथ नेशनल में स्वर्ण पदक जीता था। 2018 में गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता। इसके बाद, 2019 में दक्षिण एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता और साथ ही 32वें राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण भी जीता, साथ ही अन्य कई प्रतियोगिताओं में भी पदक जीते हैं।


कचनर चौधरी की कहानी प्रेरणा और समर्पण का प्रतीक है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि यदि मन में जज्बा और दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उनकी मेहनत और लगन ने न केवल उन्हें एक सफल खिलाड़ी बनाया है, बल्कि वह अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। राजस्थान की इस बेटी ने साबित किया है कि वह स्वर्णिम भविष्य की कुंजी है।

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