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अब प्रदेश में गाय के दूध ही नहीं, गोबर और मूत्र की भी मिलेगी कीमत – Dixit Times
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अब प्रदेश में गाय के दूध ही नहीं, गोबर और मूत्र की भी मिलेगी कीमत

लखनऊ । अब गाय का दूध ही नहीं, उनका गोबर, मूत्र और पैर से कुचले गए खरपतवार की भी कीमत मिलेगी। इसके लिए गोशालाओं में कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट लगेंगे। यहां पंचगव्य भी बनाया जाएगा। पहले चरण में आठ मंडलों में ये प्लांट लगाए जाएंगे। शुरूआत बरेली से होगी। गो सेवा आयोग और पशुपालन विभाग मिलकर इस परियोजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रदेश के हर जिले में गोशालाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। गोशालाओं में लगने वाले सीबीजी प्लांट में आसपास के किसान भी गाय का दूध, दही, गोबर व मूत्र आदि बेच सकेंगे। इससे न सिर्फ गोशालाओं की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी। साथ ही गोवंशों का संवर्धन भी होगा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में गोशालाओं में सीबीजी प्लांट चल रहे हैं। प्लांट को आॅयल और गैस कंपनियों के सहयोग से स्थापित किया गया है। ग्वालियर के लालटिपारा गोशाला के स्वामी देवानंद ने बताया कि प्लांट लगने के बाद गोबर और गोमूत्र से गाय के खाने का खर्चा निकल जाता है। दूध अतिरिक्त लाभ में है।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर के लालटिपारा गोशाला में चल रहे सीबीजी प्लांट और पंचगव्य प्लांट के बारे में स्वामी देवानंद और सिलीगुड़ी के प्रभु गुप्ता गो सेवा आयोग आए थे। इन्होंने वहां चल रहे प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दोनों ने कम्प्रेस्ड बायो गैस और पंचगव्य उत्पादों के संबंध में नवीन प्राद्योगिकी एवं मॉडल साझा किया। बताया कि सीबीजी संयंत्र गाय के गोबर को बायो सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) और जैविक खाद में बदल देता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए स्थायी विधियों को बढ़ावा मिलता है।
गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर को पानी में मिलाकर पंचगव्य बनाया जाता है। यह मिश्रण हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों और आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद विभाग के पूर्व निदेशक प्रो पीसी सक्सेना ने बताया कि पंचगव्य के उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इससे कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन की पूर्ति होती है। शरीर की शुद्धि होती है। खेत की उर्वरता बढ़ाने और कीटनाशक के रूप में किया जाता है। अभी कुछ कंपनियों द्वारा पंचगव्य तैयार किया जाता है। औषधीय पंचगव्य आधा लीटर करीब एक से डेढ़ हजार रुपये में है, जबकि खेती से जुड़ा पंचगव्य दो सौ से लेकर एक हजार रुपये तक मिलता है।
सीबीजी के क्षेत्र में नंबर वन है यूपी
कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के क्षेत्र में पूरे भारत में उत्तर प्रदेश नंबर वन पर है। प्रदेश में स्टेट लेवल कमेटी द्वारा अनुमोदित 47 बायो सीबीजी परियोजनाएं हैं, जिनकी क्षमता 407 टीपीडी और लागत 2589 करोड़ रुपये है। सबसे बड़ा सीबीजी प्लांट मथुरा में स्थापित है , जिसकी कुल क्षमता 42.6 टीपीडी है। जबकि 25 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट चल रहे हैं, जिनकी क्षमता 213 टन प्रतिदिन (टीपीडी) है। प्रदेश में पूरे देश के सर्वाधिक 19 प्रतिशत सीबीजी प्लांट्स स्थापित हैं। इसके बाद गुजरात (16 प्रतिशत), महाराष्ट्र (9 प्रतिशत) का नंबर आता है।
गो सेवा आयोग और पशुपालन विभाग इस परियोजना पर काम कर रहा है। पहले चरण में आठ मंडल की गोशाला में प्लांट स्थापित कराया जाएगा। फिर अन्य मंडलों में इसे पहुंचाया जाएगा। शुरूआत बरेली से करने की तैयारी है। इससे गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को बढावा मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण शुद्धता की दिशा में भी काम हो सकेगा।

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